• Create News
  • ▶ Play Radio
  • बीएमसी चुनाव से पहले बीजेपी का बड़ा दांव: अजित पवार से दूरी, नवाब मलिक के कारण टूट सकता है गठबंधन

    इस खबर को सुनने के लिये प्ले बटन को दबाएं।

    महाराष्ट्र की राजनीति में बीएमसी चुनावों से पहले एक बार फिर नए समीकरण बनते-बिगड़ते दिखाई दे रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी ने संकेत दे दिए हैं कि मुंबई में होने वाले स्थानीय निकाय चुनावों में वह अजित पवार की अगुवाई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ नहीं लड़ना चाहती। इस राजनीतिक हलचल ने महायुति गठबंधन की एकता को गंभीर सवालों के कटघरे में खड़ा कर दिया है। खासकर तब जब बीजेपी के वरिष्ठ नेता और कैबिनेट मंत्री आशीष शेलार ने साफ शब्दों में कह दिया कि मुंबई में नवाब मलिक की अगुवाई में चुनाव लड़ने का कोई सवाल ही नहीं उठता।

    बीजेपी ने पिछले कुछ महीनों से यह संकेत दिया था कि मुंबई में महायुति के तीन प्रमुख घटक—बीजेपी, शिवसेना (शिंदे गुट) और एनसीपी (अजित पवार गुट)—एक साथ चुनाव लड़ेंगे। स्वयं उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सार्वजनिक मंचों से इसकी घोषणा भी की थी। लेकिन बिहार विधानसभा चुनावों में प्रचंड जीत के बाद बीजेपी की राजनीतिक रणनीति अचानक बदली हुई दिख रही है। पार्टी का आत्मविश्वास बढ़ा है और मुंबई में अपने कोर हिंदू वोट बैंक को सशक्त करने के लिए वह अपनी पोज़िशनिंग फिर से तैयार करती नजर आ रही है।

    बीजेपी के नेताओं का कहना है कि नवाब मलिक की एनसीपी में अहम भूमिका गठबंधन के लिए एक चुनौती है। मलिक पर पहले भी अंडरवर्ल्ड से जुड़े एक विवादित प्रॉपर्टी डील का आरोप लगता रहा है, जिसे बीजेपी अक्सर अपने चुनावी मुद्दों में शामिल करती आई है। यही नहीं, विधानसभा चुनावों में भी बीजेपी ने नवाब मलिक और उनकी बेटी सना मलिक को समर्थन देने से साफ इनकार किया था। ऐसे में बीएमसी चुनाव में अचानक उनके साथ मंच साझा करना पार्टी की विचारधारा और छवि, दोनों के लिए असहज स्थिति पैदा करेगा।

    सूत्रों के अनुसार बीजेपी की उच्चस्तरीय बैठकों में यह प्रस्ताव रखा गया है कि मुंबई लोकल बॉडी चुनाव में एनसीपी को सहयोगी के रूप में नहीं रखा जाना चाहिए, खासकर तब जबकि नवाब मलिक को अजित पवार ने पार्टी के मुंबई प्रभारी की भूमिका दी है। इसी बदलाव ने बीजेपी को और अधिक सतर्क कर दिया है और गठबंधन के भविष्य पर संशय गहरा गया है।

    राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो बीजेपी का यह कदम केवल चेहरे के विरोध से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि एक बड़े चुनावी संदेश का हिस्सा है। पार्टी मुंबई में हिंदू वोट बैंक को पूरी तरह एकजुट करना चाहती है और मानती है कि नवाब मलिक की मौजूदगी इस एकजुटता को प्रभावित कर सकती है। दूसरी ओर, शिवसेना (शिंदे गुट) भी इस विवाद पर नजर बनाए हुए है, क्योंकि बीएमसी चुनाव उनके लिए अस्तित्व की लड़ाई मानी जाती है।

    महायुति गठबंधन के अंदर यह भी चर्चा है कि यदि बीजेपी एनसीपी को साथ लेकर नहीं चलती, तो अन्य दलों को नई रणनीति बनानी पड़ेगी। अजित पवार की पार्टी के लिए भी यह बड़ा झटका होगा, खासकर ऐसे समय में जब वह मुंबई में अपनी पैठ मजबूत करना चाहती है। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि बीजेपी का यह फैसला 2025 के बड़े चुनावी समीकरणों का संकेत है, जिसमें पार्टी छोटे सहयोगियों पर निर्भरता कम कर अपने दम पर मजबूत उपस्थिति बनाना चाहती है।

    मुंबई बीएमसी चुनाव हमेशा से देश के सबसे बड़े नगर निकाय चुनाव माने जाते हैं और इनका राजनीतिक प्रभाव महाराष्ट्र की सत्ता तक पहुंचता है। इसलिए इस गठबंधन संकट का सीधा असर आने वाले महीनों की राजनीति पर दिखाई देगा। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या बीजेपी आधिकारिक तौर पर गठबंधन तोड़ने का फैसला लेती है या फिर आखिरी समय में कोई राजनीतिक समझौता सामने आता है। लेकिन फिलहाल इतना तय है कि बीएमसी चुनाव 2025 से पहले महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर तय माना जा रहा है।

  • Related Posts

    राजस्थान जालोर के छोटे से गांव से राष्ट्रीय तकनीकी ब्रांड तक का सफर, भंवर सुथार ने आस्थासॉफ्ट टेक्नोलॉजीज़ के माध्यम से रचा सफलता का नया इतिहास

    इस खबर को सुनने के लिये प्ले बटन को दबाएं। भारत के तेजी से विकसित हो रहे सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और वित्तीय प्रौद्योगिकी (FinTech) क्षेत्र में आस्थासॉफ्ट टेक्नोलॉजीज़ प्राइवेट लिमिटेड…

    Continue reading
    शरद पवार और सुप्रिया सुले ने की प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात, एनडीए में समर्थन की चर्चाओं के बीच सियासी हलचल तेज

    इस खबर को सुनने के लिये प्ले बटन को दबाएं। संसद के मानसून सत्र के दौरान विपक्ष के विरोध-प्रदर्शन के बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के प्रमुख शरद…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *