राजस्थान में विशेष मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया यानी SIR (स्पेशल रिवीज़न) को लेकर राजनीति लगातार गर्माती जा रही है। इस मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं, जिसके चलते राज्य में सियासी माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया है। आरोपों की तीव्रता इस हद तक बढ़ गई है कि अब मतदाता सूची में विदेशी नागरिकों—जिनमें कथित रूप से पाकिस्तानी मूल के लोग, रोहिंग्या और बांग्लादेशी शामिल बताए जा रहे हैं—के नाम जुड़ने और इनके वोट डालने की बात तक कही जा रही है। इस पूरे विवाद ने आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक मंच को पूरी तरह उत्तेजित कर दिया है।
SIR प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन और शुद्ध करना है, जिसमें गलत नाम हटाने और नए पात्र मतदाताओं को जोड़ने का काम होता है। लेकिन, यह प्रक्रिया जहां प्रशासनिक रूप से एक नियमित कार्य है, वहीं राजनीतिक दलों के लिए यह चुनावी जमीन को प्रभावित करने वाला अहम कारक माना जा रहा है। इसी वजह से दोनों प्रमुख दल इस मुद्दे को लेकर आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं।
भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी SIR प्रक्रिया से डरी हुई है, क्योंकि इससे मतदाता सूची में कथित रूप से जोड़े गए फर्जी और अयोग्य नाम हट सकते हैं। परनामी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकारों के दौरान ऐसी प्रवृत्ति बढ़ी, जिसमें कथित विदेशी नागरिकों—जैसे बांग्लादेशी, रोहिंग्या और कुछ पाकिस्तानी मूल के लोगों—के नाम मतदाता सूची में शामिल किए गए। उन्होंने दावा किया कि इस तरह के नाम जोड़कर कांग्रेस राजनीतिक लाभ लेना चाहती थी, क्योंकि ये मतदाता कथित रूप से उसके समर्थन में रहते हैं।
परनामी ने कहा कि SIR अभियान के चलते ऐसे सभी अयोग्य वोटरों की पहचान की जा रही है और उन्हें हटाया जा रहा है, जिससे कांग्रेस बेचैन है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस SIR के बारे में भ्रम फैलाने में जुटी है, क्योंकि उसे डर है कि साफ-सुथरी मतदाता सूची चुनावी परिणामों को उसकी उम्मीदों के विपरीत प्रभावित कर सकती है।
वहीं कांग्रेस ने भाजपा के इन आरोपों को पूरी तरह निराधार और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाजपा मुद्दों से भटककर जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रही है और SIR प्रक्रिया का राजनीतिकरण कर रही है। कांग्रेस का दावा है कि भाजपा चुनावी नैरेटिव को प्रभावित करने के लिए जानबूझकर मतदाता सूची पर सवाल उठा रही है।
इस बीच, SIR प्रक्रिया के दौरान बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर्स) की मौतों का मुद्दा भी गरमा गया है। विपक्ष ने बीएलओ के बढ़ते दबाव, कार्यभार और कथित उपेक्षा को जिम्मेदार बताया है। हालांकि, प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सभी घटनाओं की जांच की जा रही है और SIR प्रक्रिया नियमानुसार चल रही है।
राजस्थान में यह पूरा विवाद ऐसे समय में उभर रहा है जब चुनावी तैयारियां तेज हो चुकी हैं और राजनीतिक दल अपने वोट बैंक को मजबूत करने में जुटे हुए हैं। मतदाता सूची को लेकर उठे सवालों ने राज्य में नई बहस को जन्म दे दिया है कि क्या SIR प्रक्रिया वास्तव में वोटर लिस्ट को शुद्ध कर रही है या यह केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का नया मोर्चा बन गई है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव से पहले इस तरह के विवाद आमतौर पर सामने आते हैं, लेकिन इस बार विदेशी घुसपैठियों के वोट डालने जैसे गंभीर आरोपों ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है। अब देखना यह होगा कि SIR प्रक्रिया पूरी होने के बाद मतदाता सूची में क्या बदलाव सामने आते हैं और उनका राजनीतिक प्रभाव किस पर कितना पड़ता है।








