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भारत और श्रीलंका के बीच द्विपक्षीय संबंध लगातार मजबूत होते जा रहे हैं। विशेष रूप से रक्षा और सुरक्षा सहयोग के क्षेत्र में दोनों देशों की साझेदारी नए आयाम स्थापित कर रही है। इसी कड़ी में दोनों देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के बीच बोधगया में तीन दिवसीय आर्मी-टू-आर्मी स्टाफ वार्ता आयोजित की गई। इस वार्ता का उद्देश्य था—द्विपक्षीय सैन्य संबंधों को विस्तार देना, इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाना और क्षेत्रीय सुरक्षा तंत्र को और अधिक सक्षम बनाना।
भारतीय सेना की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह वार्ता अत्यंत सकारात्मक और भविष्य के सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण रही।
तीन दिवसीय वार्ता का उद्देश्य और महत्व
इस बैठक का मुख्य फोकस दोनों देशों की सेनाओं के बीच सामरिक सहयोग को बढ़ाना था ताकि दक्षिण एशिया में बदलते सुरक्षा परिदृश्य का बेहतर ढंग से सामना किया जा सके। भारत और श्रीलंका हिंद महासागर क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करने में दोनों देशों की साझेदारी अहम है।
वार्ता के दौरान निम्न मुद्दों पर चर्चा की गई:
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संयुक्त सैन्य अभ्यास को और विस्तार देना
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प्रशिक्षण कार्यक्रमों में वृद्धि
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आधुनिक सैन्य तकनीक पर सहयोग
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आपदा प्रबंधन और मानवीय सहायता संचालन में संयुक्त भागीदारी
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बॉर्डर डिफेंस के लिए साझा रणनीति
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इंटरऑपरेबिलिटी और आपसी विश्वास बढ़ाना
इन सभी बिंदुओं का प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दोनों सेनाएं किसी भी संभावित क्षेत्रीय खतरे या सुरक्षा चुनौती का संयुक्त रूप से प्रभावी समाधान कर सकें।
श्रीलंका से आया उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल
इस बैठक में श्रीलंका की तरफ से छह-सदस्यीय सैन्य प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया। इस टीम का नेतृत्व श्रीलंकाई सेना के मेजर जनरल रवी पथिराविथाना, डायरेक्टर जनरल जनरल स्टाफ, ने किया।
प्रतिनिधिमंडल ने भारत के साथ साझेदारी को मजबूत बताते हुए कहा कि दोनों सेनाओं के बीच वर्षों से बना विश्वास और सहयोग आने वाले समय में और अधिक बढ़ेगा।
मेजर जनरल पथिराविथाना ने यह भी कहा कि भारत और श्रीलंका की सेनाएं न केवल प्रशिक्षण साझेदारी की दिशा में जुड़े हैं, बल्कि समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी अभियानों पर भी संयुक्त कार्य कर रही हैं।
भारतीय सैन्य अधिकारियों ने साझा किए रणनीतिक इनपुट
भारत की ओर से सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस बैठक में हिस्सा लिया। उन्होंने श्रीलंका के साथ सैन्य सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे, जिनमें शामिल थे:
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उन्नत युद्ध प्रशिक्षण कार्यक्रम
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विशेष ऑपरेशन प्रशिक्षण
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सैन्य तकनीकी साझेदारी
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आर्मी-टू-आर्मी संचार चैनलों को और अधिक मजबूत बनाना
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संयुक्त सैन्य अभ्यास बढ़ाना (स्पेशल फोर्सेज और इन्फैंट्री स्तर पर)
भारतीय अधिकारियों का कहना था कि दोनों देशों की सेनाओं के बीच वर्षों से बने भरोसे और अनुभव की वजह से रक्षा सहयोग लगातार मजबूती पा रहा है।
क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से अहम वार्ता
हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती भू-राजनीतिक गतिविधियों और सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए इस तरह की वार्ताएं अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
भारत और श्रीलंका की सेनाएं आतंकवाद, समुद्री तस्करी, अवैध घुसपैठ, मानव तस्करी और समुद्री सुरक्षा से संबंधित कई मुद्दों पर एक-दूसरे के साथ सहयोग करती रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस वार्ता से क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचा और मजबूत होगा और दोनों देशों की सेनाएं मिलकर भविष्य की चुनौतियों का अधिक प्रभावी सामना कर सकेंगी।
प्रशिक्षण और संयुक्त अभ्यास पर जोर
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि:
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भारत के सैन्य प्रशिक्षण संस्थानों में श्रीलंकाई सैनिकों की संख्या बढ़ाई जाएगी।
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संयुक्त फील्ड एक्सरसाइज को और व्यापक किया जाएगा।
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आधुनिक युद्ध तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सैन्य प्रणालियों पर सहयोग बढ़ाया जाएगा।
Indian Army और Sri Lankan Army पहले से ही ‘मित्र शक्ति’ जैसे संयुक्त अभ्यासों के माध्यम से सैन्य अनुभव साझा करती हैं। नई वार्ता ने इन गतिविधियों को और विस्तार देने का मार्ग प्रशस्त किया है।
भारत और श्रीलंका की इस महत्वपूर्ण सैन्य वार्ता ने स्पष्ट कर दिया कि दोनों देश भविष्य में रक्षा सहयोग को और अधिक मजबूत करने के प्रति प्रतिबद्ध हैं।
बोधगया में हुई तीन दिवसीय वार्ता ने न केवल सैन्य रिश्तों को मजबूत किया, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा की दिशा में भी एक नई ऊर्जा प्रदान की। यह बैठक आने वाले वर्षों में हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।







