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दिल्ली-एनसीआर में हाल के दिनों में वायु प्रदूषण की स्थिति गंभीर रूप ले चुकी है, और इसका असर संसद के शीतकालीन सत्र में भी देखने को मिला। बुधवार को विपक्षी दलों के कई सांसद संसद परिसर में गैस मास्क पहनकर पहुंचे, ताकि गंभीर प्रदूषण से होने वाले स्वास्थ्य खतरों से खुद को बचाया जा सके। सांसदों का यह कदम न केवल स्वास्थ्य सुरक्षा की दृष्टि से था, बल्कि उन्होंने इसे प्रदूषण संकट के प्रति सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाने का माध्यम भी बनाया।
विपक्षी नेताओं का कहना है कि दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है और इससे आम नागरिकों की जीवन शैली और स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। सांसदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से यह मांग की कि केंद्र सरकार इस संकट से निपटने के लिए प्रभावी और ठोस कदम उठाए। विपक्ष ने जोर देकर कहा कि संसद में इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया जाना चाहिए और तत्काल उपाय किए जाने चाहिए, ताकि राजधानी और आसपास के क्षेत्रों के नागरिक सुरक्षित रह सकें।
विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण का मुख्य कारण वाहनों से निकलने वाला धुआँ, औद्योगिक गतिविधियां और ठंड के मौसम में बढ़ती धुंध है। मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ सप्ताह में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) कई बार “खतरनाक” श्रेणी में पहुंच गया है, जिससे श्वसन संबंधी बीमारियों में भी वृद्धि हुई है।
सांसदों ने संसद में उपस्थित होकर कहा कि यह सिर्फ एक राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह जनता के स्वास्थ्य का सवाल है। उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार के साथ राज्य सरकारें मिलकर प्रदूषण नियंत्रण के लिए व्यापक रणनीति तैयार करें। विपक्ष ने विशेष रूप से वाहनों की जांच, निर्माण स्थलों से धूल नियंत्रण, उद्योगों के उत्सर्जन नियमों की कड़ी निगरानी और हरित क्षेत्रों के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया।
संसद परिसर में विपक्ष का यह प्रदर्शन मीडिया में भी व्यापक रूप से देखा गया। कई सांसदों ने कहा कि संसद में बैठने के बावजूद सांस लेने में परेशानी हो रही थी, और यह दर्शाता है कि दिल्ली-एनसीआर की जनता किस प्रकार से प्रदूषण के दुष्प्रभाव का सामना कर रही है। उन्होंने पीएम मोदी से अपील की कि इस समस्या को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाए और सरकार की ओर से जनता के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए तत्काल उपाय किए जाएं।
विपक्ष के इस कदम के बाद संसद में वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य सुरक्षा पर बहस तेज हो गई। कई सांसदों ने इस मुद्दे को सत्र में स्थायी समिति के स्तर तक ले जाने की भी बात कही। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदूषण पर ध्यान देने और कड़े कदम उठाने से ही दिल्ली-एनसीआर की हवा को सुरक्षित और स्वच्छ बनाया जा सकता है।
इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि वायु प्रदूषण न केवल पर्यावरणीय चुनौती है, बल्कि यह स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों पर भी गहरा प्रभाव डालता है। सांसदों के इस आंदोलन ने सरकार और जनता दोनों के लिए चेतावनी दी है कि अब समय है प्रदूषण नियंत्रण के लिए ठोस और तेज़ कार्रवाई करने का।







