
आज गणेश केशवराव ठाकरे Alkesh Multi Services के संस्थापक हैं—एक ऐसा उभरता हुआ व्यावसायिक समूह, जो तकनीक, नवीकरणीय ऊर्जा, निर्माण और आवश्यक सेवाओं के क्षेत्र में निरंतर विस्तार कर रहा है। लेकिन यह सफलता उन्हें सहजता से नहीं मिली, बल्कि इसके पीछे वर्षों का संघर्ष, त्याग और अपमान सहने का इतिहास छिपा है।
गणेश का जन्म अकोला जिले के बालापुरजी तहसील स्थित कलंबा खु. गांव में एक सामान्य किसान परिवार में हुआ। माता-पिता और दो छोटी बहनों सहित पाँच सदस्यों का परिवार मात्र 8×7 फीट के छोटे से कमरे में जीवन व्यतीत करता था। रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी संघर्ष करना पड़ता था।
परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए गणेश को पढ़ाई के लिए उनके मामा के गांव भेज दिया गया, लेकिन वहाँ भी गरीबी ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। बचपन से ही उन्हें काम और पढ़ाई दोनों का बोझ उठाना पड़ा।
कक्षा पाँचवी से बारहवीं तक, गणेश हर सुबह सुबह 4 बजे से 9 बजे तक लगभग 150 अख़बार बाँटते थे, जिसके बदले उन्हें सिर्फ 5 रुपये प्रतिदिन मिलते थे। स्कूल के बाद खेतों में चारा काटना, कृषि मजदूरी करना—यह उनकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी बन चुकी थी।
लगभग आठ वर्षों तक उन्होंने यह काम किया, लेकिन वेतन कभी नहीं बढ़ा। बारिश, सर्दी, गर्मी—कोई भी परिस्थिति उनके कर्तव्य से उन्हें रोक नहीं पाई। इसी दौरान उनके मन में यह संकल्प पक्का हो गया कि वे जीवनभर नौकरी करने वाले व्यक्ति नहीं बनेंगे।
आर्थिक तंगी के बावजूद गणेश पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहे। जब उनके सहपाठी महंगी ट्यूशन क्लासेस जाते थे, गणेश अख़बार बांटते थे। तानों और उपहास के बावजूद उन्होंने कक्षा 10वीं में स्कूल टॉपर बनकर यह साबित कर दिया कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती।
लेकिन 11वीं–12वीं में परिस्थितियाँ और कठिन हो गईं। विज्ञान शाखा की ट्यूशन फीस, कॉलेज खर्च और पढ़ाई का दबाव—सब मिलकर उन पर भारी पड़ने लगे।
आर्थिक तनाव और मानसिक थकान के कारण गणेश ने 12वीं में कॉलेज जाना बंद कर दिया, जिसका परिणाम बेहद दर्दनाक रहा। वे चार विषयों में फेल हो गए। रिश्तेदारों द्वारा सार्वजनिक अपमान किया गया, खासकर एक शादी समारोह में हुए शब्दों ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया।
टूटे मन से उन्होंने सब कुछ छोड़ दिया और शेगांव चले गए, जहाँ गजानन महाराज मंदिर के पास एक होटल में सफाई कर्मचारी की नौकरी करने लगे—जबकि उन्होंने कभी नौकरी न करने की कसम खाई थी।
एक दिन अपने पुराने सहपाठी को आगे बढ़ते देख, जब वे खुद फर्श पोछ रहे थे, तो उन्हें गहरा आघात लगा। उसी दिन उन्होंने नौकरी छोड़ दी।
गणेश ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने फिर से 12वीं की परीक्षा दी और सफलता प्राप्त की। कॉलेज की फीस भरने के लिए वे कंप्यूटर शॉप में काम करने लगे और आगे चलकर बी.एससी. की पढ़ाई शुरू की।
इसी दौरान एक और बड़ी चुनौती सामने आई—उनकी छोटी बहनों की शिक्षा। जब रिश्तेदारों ने पढ़ाई के बजाय शादी का सुझाव दिया, तो गणेश ने स्पष्ट निर्णय लिया—
“मेरी बहनें पढ़ेंगी, चाहे मुझे कुछ भी कुर्बान करना पड़े।”
परिवार को लेकर वे शेगांव आ गए, जहाँ उनकी तनख्वाह घर के किराए से भी कम थी, फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी।
डिजिटल शिक्षा के बढ़ते प्रभाव को समझते हुए गणेश ने अवसर को पहचाना। घर में इंटरनेट न होने के कारण वे दोस्तों का लैपटॉप लेकर, कॉलेज के पीछे खेतों में बैठकर रात में काम करते थे।
बाद में उन्होंने एक इंटरनेट कैफे किराए पर लिया और सुबह 8 बजे से रात 12 बजे तक मेहनत की। हालांकि मालिक ने धोखा देकर उन्हें रातों-रात बाहर निकाल दिया, लेकिन यह भी उन्हें रोक नहीं सका।
एक मित्र की मदद से उन्होंने Alkesh Computers & Xerox की शुरुआत की, जो आगे चलकर Alkesh Computers के रूप में स्थापित हुआ।
कंप्यूटर व्यवसाय की सफलता से गणेश ने शेगांव में 25 लाख रुपये का घर खरीदा। इसके बाद उन्होंने सोलर एनर्जी क्षेत्र में कदम रखा, जहाँ उन्हें भारी धोखे और आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा।
फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और पारिवारिक सहयोग से नए व्यवसाय शुरू किए:
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श्री कृपा फ्लोर मिल – माता द्वारा संचालित
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आनंद एक्वा (पेयजल) – पिता द्वारा संचालित
इन सभी व्यवसायों को मिलाकर बना Alkesh Multi Services, जिसका नाम उन्होंने अपने माता-पिता अलका और केशव के नाम से जोड़ा।
सफलता के साथ-साथ जीवन ने गणेश की भावनात्मक परीक्षा भी ली। इसी दौरान उनकी मुलाकात दिव्या से हुई, जिन्होंने उन्हें फिर से जीवन में विश्वास करना सिखाया। यह रिश्ता 27 नवंबर 2025 को विवाह में परिणत हुआ।
आज Alkesh Multi Services के अंतर्गत संचालित हैं:
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Alkesh Computers (Internet Café)
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Skylight Solar (रूफटॉप सोलर)
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Shree Krupa Flour Mill
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Anand Aqua
आगामी महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स:
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Alkesh IT Park – 1108 कंप्यूटरों का परीक्षा केंद्र
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Mahajit Multiplex Park – भारत का पहला पार्किंग-फ्रेंडली फिल्म शूटिंग स्टूडियो
उनकी प्रेरणादायक यात्रा को सम्मानित करते हुए, गणेश केशवराव ठाकरे को “Maharashtra Business Icon 2025” पुरस्कार के लिए चुना गया है। यह पुरस्कार Reseal.in और India Fashion Icon Magazine द्वारा दिया जा रहा है।
इस भव्य समारोह में वरिष्ठ फिल्म अभिनेत्री वरखा उसगांवकर, सोनाली कुलकर्णी और प्रार्थना बेहेरे जैसी जानी-मानी हस्तियाँ उपस्थित रहेंगी। कार्यक्रम का आयोजन रेसील.इन के संस्थापक व सीईओ श्री सुधीर कुमार पठाडे के नेतृत्व में हो रहा है।
गणेश केशवराव ठाकरे मानते हैं कि अपमान, धोखा और आर्थिक नुकसान—यही उनकी सफलता के सबसे बड़े शिक्षक बने। उन्होंने परिस्थितियों को कोसा नहीं, बल्कि उन्हें अपनी ताकत बना लिया।
उनकी कहानी हर उस युवा के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने की हिम्मत रखता है।









