सुकेशनी के लिए टेलरिंग कभी सिर्फ सुई, धागे और कपड़ों को सिलने तक सीमित नहीं रही। यह उनके लिए एक कला है, आत्म-अभिव्यक्ति का माध्यम है और सबसे बढ़कर आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव है। पिछले दस वर्षों में उन्होंने अपने हुनर, समर्पण और सोच के माध्यम से कला कौशल्य केंद्र (Kala Kaushalya Kendra) को एक ऐसे प्रशिक्षण संस्थान के रूप में स्थापित किया है, जो भारत में सिलाई और टेलरिंग सीखने की परंपरागत सोच को सकारात्मक रूप से बदल रहा है।
सुकेशनी की यात्रा कपड़ों, डिज़ाइन और फिटिंग के प्रति गहरे प्रेम से शुरू हुई। शुरुआत में यह एक व्यक्तिगत रुचि थी, लेकिन समय के साथ यह जुनून एक उद्देश्य में बदल गया। लगातार अभ्यास, प्रयोग और सीखने की ललक ने उन्हें टेलरिंग के क्षेत्र में निखार दिया।
वे मानती हैं,
“टेलरिंग केवल एक हुनर नहीं, बल्कि एक सुपरपावर है।”
कच्चे कपड़े को सुंदर परिधान में बदलने की कला उनके लिए आत्मविश्वास, स्वतंत्रता और रचनात्मक नियंत्रण का प्रतीक है। यही सोच आगे चलकर उनके शिक्षण और मार्गदर्शन का आधार बनी।
टेलरिंग शिक्षा में व्यवहारिक, सरल और सीखने वाले के अनुकूल प्रशिक्षण की कमी को महसूस करते हुए, सुकेशनी ने कला कौशल्य केंद्र की स्थापना की। उनका उद्देश्य स्पष्ट था—
सिलाई को हर किसी के लिए सुलभ, व्यवस्थित और सशक्त बनाना, चाहे वह शौक के तौर पर सीखना हो या व्यवसाय की शुरुआत के लिए।
‘कला’ और ‘कौशल्य’—इन दोनों शब्दों का संगम उनके मिशन को दर्शाता है, जहाँ रचनात्मकता और तकनीक का संतुलन सिखाया जाता है। यह केंद्र केवल एक क्लासरूम नहीं है, बल्कि वह जगह है जहाँ कपड़ों के साथ-साथ आत्मविश्वास भी सिला जाता है।
सुकेशनी की सबसे बड़ी ताकत उनकी शिक्षण पद्धति है। उन्होंने पिछले दस वर्षों में ऐसी प्रशिक्षण शैली विकसित की है, जिसमें जटिल टेलरिंग तकनीकों को आसान और समझने योग्य चरणों में सिखाया जाता है।
स्लीव सेटिंग, पॉकेट डिज़ाइन, फिटिंग, फिनिशिंग जैसी कठिन मानी जाने वाली तकनीकें भी यहां आत्मविश्वास के साथ सिखाई जाती हैं। उनका मानना है कि
“सही मार्गदर्शन मिले तो हर व्यक्ति सिलाई सीख सकता है।”
वे विद्यार्थियों को सिर्फ ‘कैसे’ नहीं, बल्कि ‘क्यों’ समझाती हैं, जिससे सीखने वाले अपने दम पर इन कौशलों को आगे उपयोग में ला सकें।
कला कौशल्य केंद्र में सीखने आने वाले विद्यार्थियों की पृष्ठभूमि विविध है—
गृहिणियाँ जो अपने कपड़े खुद सिलना चाहती हैं,
युवा क्रिएटिव्स जो फैशन की दुनिया में कदम रखना चाहते हैं,
और वे उद्यमी जो अपनी टेलरिंग यूनिट या डिजाइनर ब्रांड शुरू करने का सपना देखते हैं।
सुकेशनी यह सुनिश्चित करती हैं कि छात्र सिर्फ तकनीकी ज्ञान न सीखें, बल्कि उनमें आत्मविश्वास, पेशेवर सोच और आर्थिक आत्मनिर्भरता की भावना भी विकसित हो।
सुकेशनी के कार्य की जड़ में उनका उद्देश्य छिपा है। वे टेलरिंग को एक जीवनोपयोगी कौशल मानती हैं, खासकर उन महिलाओं के लिए जो लचीले और स्थायी करियर की तलाश में हैं।
हर कक्षा धैर्य, प्रोत्साहन और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पर आधारित होती है। वे अक्सर अपने विद्यार्थियों से कहती हैं—
“मेरी क्लास से जुड़िए और आइए, एक-एक टांके के साथ आपके सपनों को आकार दें।”
यह वाक्य आज उनके शिक्षण दर्शन की पहचान बन चुका है।
आज कला कौशल्य केंद्र यह साबित करता है कि समर्पण, कौशल और उद्देश्यपूर्ण शिक्षा मिलकर कितना बड़ा प्रभाव पैदा कर सकते हैं। सुकेशनी की यात्रा एक फैब्रिक लवर से एक सम्मानित मार्गदर्शक तक की है, जो भारत में स्किल-बेस्ड एंटरप्रेन्योरशिप की बढ़ती लहर को दर्शाती है।
वे सिर्फ परिधान नहीं बना रहीं—
वे भविष्य गढ़ रही हैं,
हर छात्र के साथ,
हर टांके के साथ,
और हर सपने के साथ।
अपने उल्लेखनीय योगदान और उपलब्धियों के लिए सुकेशनी को “महाराष्ट्र बिज़नेस आइकन 2025 / महाराष्ट्र स्टाइल आइकन 2025 / महाराष्ट्र फैशन आइकन 2025” पुरस्कारों के लिए चुना गया है।
यह सम्मान Reseal.in और India Fashion Icon Magazine द्वारा प्रदान किया जा रहा है, जो महाराष्ट्र के उभरते उद्यमियों और रचनात्मक प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच प्रदान करते हैं।
भव्य पुरस्कार समारोह में प्रतिष्ठित फिल्मी हस्तियां शामिल होंगी—
वर्षा उसगांवकर
सोनाली कुलकर्णी
प्रार्थना बेहेरे
यह आयोजन श्री सुधीर कुमार पठारे, संस्थापक एवं CEO – Reseal.in (Sure Me Multipurpose Pvt. Ltd.) के नेतृत्व में संपन्न हो रहा है, जो वर्षों से महाराष्ट्र की प्रतिभाओं को राष्ट्रीय पहचान दिलाने का कार्य कर रहे हैं।








