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मराठवाड़ा के लातूर जिले से आयुर्वेद चिकित्सा को नई पहचान देने वाले डॉ. राजेंद्र राठोड बीते लगभग 19 वर्षों से आयुर्वेद चिकित्सा के क्षेत्र में निस्वार्थ सेवा करते आ रहे हैं। आधुनिक चिकित्सा के बढ़ते प्रभाव के बीच, उन्होंने आयुर्वेद जैसे प्राचीन भारतीय विज्ञान को समाज के हर वर्ग तक पहुँचाने का संकल्प लिया और उसे सफलतापूर्वक साकार किया।
डॉ. राजेंद्र राठोड ने आयुर्वेद की शिक्षा पुणे स्थित सुमतीबाई शहा आयुर्वेद कॉलेज से प्राप्त की। इसके पश्चात उन्होंने पंचकर्म विशेषज्ञता तथा योग आयुर्वेद डिप्लोमा भी पूर्ण किया। शिक्षा पूर्ण करने के बाद जहाँ अधिकांश आयुर्वेद चिकित्सक पुणे-मुंबई जैसे महानगरों को प्राथमिकता देते हैं, वहीं सद्गुरु कृपा और माता-पिता के आशीर्वाद से उन्होंने लातूर जिले के निलंगा तालुका को अपनी कर्मभूमि चुना।
उस समय निलंगा क्षेत्र में आयुर्वेद की जानकारी बहुत सीमित थी। आम जनता तत्काल राहत देने वाली एलोपैथिक दवाओं पर निर्भर थी और आयुर्वेदिक उपचारों को लेकर शंका बनी रहती थी। ऐसे माहौल में आयुर्वेद स्थापित करना एक बड़ी चुनौती थी।
साल 2007 में डॉ. राठोड ने निलंगा में दो छोटे किराए के कमरों में अपना आयुर्वेद क्लिनिक शुरू किया। क्लिनिक में पंचकर्म विभाग, औषधि विभाग और परामर्श कक्ष स्थापित किए गए। शुरुआती दिनों में मरीजों की संख्या बहुत कम थी और आर्थिक लाभ भी सीमित था, लेकिन उनका उद्देश्य स्पष्ट था—आयुर्वेद को आम जनजीवन का हिस्सा बनाना।
उन्होंने आयुर्वेदिक शिविरों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया और बेहद किफायती दरों पर उपचार उपलब्ध कराया। कई बार अग्निकर्म, विद्धकर्म, स्नेहन-स्वेदन, लीच थैरेपी, कपिंग और मोक्सा जैसी आधुनिक आयुर्वेदिक पद्धतियाँ निःशुल्क भी प्रदान की गईं।
जीवनसाथी के रूप में उन्हें भी आयुर्वेद को समर्पित एक चिकित्सक मिलीं। पंचकर्म और स्त्री-रोग चिकित्सा में उनकी पत्नी की विशेषज्ञता से क्लिनिक का दायरा और प्रभाव बढ़ा। स्त्री रोग, बांझपन, पाचन विकार, वात रोग, लकवा, स्ट्रोक और कैंसर तक के मामलों में आयुर्वेदिक उपचार से सकारात्मक परिणाम मिलने लगे।
धीरे-धीरे आयुर्वेद केवल अंतिम विकल्प न रहकर पहली पसंद बनने लगा।
कुछ वर्षों बाद बच्चों की शिक्षा हेतु डॉ. राठोड ने लातूर शहर में अपने स्वयं के भवन में आयुर्वेद क्लिनिक शुरू किया। यहाँ भी उन्हें जबरदस्त मरीज-प्रतिक्रिया मिली। बेहतर संपर्क सुविधाओं के कारण उन्होंने मुंबई (ठाणे, दादर) और पुणे में विज़िटिंग ओपीडी शुरू की।
कोविड-19 महामारी के दौरान, जब पूरा देश ठहर सा गया था, तब डॉ. राठोड ने फोन कंसल्टेशन और निःशुल्क मार्गदर्शन के माध्यम से सैकड़ों मरीजों की सेवा की। कई आयुर्वेदिक काढ़े और औषधियाँ भी मुफ्त प्रदान की गईं।
लगभग दो दशकों की निरंतर सेवा के बाद, आज डॉ. राजेंद्र राठोड का यह आयुर्वेदिक पौधा एक मजबूत वृक्ष बन चुका है। भविष्य में उनका लक्ष्य एक अत्याधुनिक आयुर्वेदिक अस्पताल की स्थापना करना है, जिससे और अधिक लोगों को शुद्ध, वैज्ञानिक और प्रभावी आयुर्वेदिक उपचार मिल सके।
वर्तमान में वे लातूर, निलंगा, पुणे और मुंबई में सक्रिय रूप से सेवा दे रहे हैं तथा पिछले 20 वर्षों से कोल्हापुर स्थित एक ट्रस्ट अस्पताल में भी आयुर्वेदिक सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं।
डॉ. राजेंद्र राठोड की चिकित्सा सेवा, सामाजिक योगदान और आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार में उल्लेखनीय कार्य को देखते हुए उन्हें “महाराष्ट्र बिजनेस आइकॉन 2025 / महाराष्ट्र स्टाइल आइकॉन 2025 / महाराष्ट्र फैशन आइकॉन 2025” जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों के लिए चयनित किया गया है।
यह सम्मान Reseal.in और India Fashion Icon Magazine द्वारा प्रदान किया जा रहा है, जो महाराष्ट्र के उभरते उद्यमियों, प्रोफेशनल्स और समाजसेवियों को राष्ट्रीय मंच प्रदान करता है।
यह उपलब्धि केवल डॉ. राठोड के लिए ही नहीं, बल्कि मराठवाड़ा क्षेत्र और आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के लिए भी गौरव का क्षण है।
इस भव्य पुरस्कार समारोह में मराठी एवं हिंदी सिनेमा की जानी-मानी हस्तियाँ उपस्थित रहेंगी, जिनमें—
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🎬 वर्षा उसगांवकर
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🎬 सोनाली कुलकर्णी
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🎬 प्रार्थना बेहेरे
शामिल हैं।
इस आयोजन का नेतृत्व श्री सुधीर कुमार पाठाडे, संस्थापक एवं CEO, Reseal.in (Sure Me Multipurpose Pvt. Ltd.) द्वारा किया जा रहा है, जो महाराष्ट्र की प्रतिभाओं को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।








