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कभी-कभी ज़िंदगी में सब कुछ सही दिखाई देता है, लेकिन भीतर कहीं एक खालीपन रह जाता है। ऐसा ही खालीपन भावेश शेलके ने महसूस किया। पुणे के खराड़ी इलाके में अच्छी नौकरी, नियमित वेतन और सुरक्षित करियर होने के बावजूद, रोज़ का जीवन उन्हें संतोष नहीं दे पा रहा था।
मेस का खाना पेट तो भर देता था, लेकिन दिल को तृप्त नहीं कर पाता था।
यहीं से उनके जीवन का सबसे अहम सवाल जन्मा—
क्या इंसान की भूख सिर्फ पेट की होती है, या दिल की भी?
इसी सवाल ने आगे चलकर एक ऐसे विचार को जन्म दिया, जिसने आज ‘हक्काचं ठिकाण’ को सिर्फ एक भोजनालय नहीं, बल्कि अपनापन देने वाली पहचान बना दिया।
भावेश को हमेशा अपनी माँ के हाथ के खाने की याद आती थी। उनके लिए माँ का खाना सिर्फ स्वाद नहीं, बल्कि शुद्धता, अनुशासन और प्यार का प्रतीक था। बिना शॉर्टकट, बिना मिलावट और पूरे मन से बना भोजन—यही उनके घर की पहचान थी।
एक दिन जब भावेश ने अपनी माँ से पूछा कि वे इतना मन लगाकर खाना क्यों बनाती हैं, तो उन्होंने बहुत सादगी से कहा—
“खाना सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं होता, उसमें प्यार भी होना चाहिए।”
यही एक वाक्य ‘हक्काचं ठिकाण’ की नींव बन गया।
नौकरी छोड़ने का फैसला आसान नहीं था। परिवार की चिंता, समाज की राय और भविष्य की अनिश्चितता—सब कुछ सामने था। लेकिन भावेश जानते थे कि अगर अब हिम्मत नहीं की, तो शायद कभी नहीं कर पाएँगे।
उन्होंने बड़े निवेश, फैंसी इंटीरियर या विज्ञापनों के बिना, मानखुर्द इलाके में ‘हक्काचं ठिकाण’ की शुरुआत की।
उनके पास सिर्फ तीन चीज़ें थीं—
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एक सच्चा और ईमानदार विचार
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माँ के अनुभव और घर के स्वाद की विरासत
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और खुद पर अटूट विश्वास
शुरुआत के पहले दिन सिर्फ 25 ग्राहक आए।
दूसरे दिन संख्या बढ़ी।
तीसरे दिन पुराने ग्राहक अपने दोस्तों को साथ लेकर आए।
भावेश मानते हैं—
“अच्छे काम को विज्ञापन की ज़रूरत नहीं होती, संतुष्ट ग्राहक खुद ब्रांड एंबेसडर बन जाता है।”
हालाँकि यह सफर आसान नहीं था। खर्च बढ़ते गए, मुनाफ़ा देर से दिखा और कई रातें चिंता में बीतीं। लेकिन एक दिन एक ग्राहक का मैसेज आया—
“आपके यहाँ का खाना मुझे घर की याद दिला देता है।”
यही एक पंक्ति उनके लिए सबसे बड़ा पुरस्कार बन गई।
आज ‘हक्काचं ठिकाण’ सिर्फ एक खाने की जगह नहीं है। यह—
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घर जैसा स्वाद देता है
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स्वच्छ, पौष्टिक और किफायती भोजन उपलब्ध कराता है
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यहाँ काम करने वाली महिलाओं को आत्मसम्मान और रोज़गार देता है
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और ग्राहकों को अपनापन और भरोसा देता है
भावेश का मानना है—
“शुद्ध और परवडणारा (किफायती) खाना कोई लग्ज़री नहीं, बल्कि हर इंसान का हक़ है।”
भावेश का सपना है कि ‘हक्काचं ठिकाण’ सिर्फ एक इलाके तक सीमित न रहे। जहाँ-जहाँ लोग घर से दूर रहकर संघर्ष कर रहे हैं, वहाँ उन्हें घर के खाने का सुकून मिलना चाहिए—यही उनका लक्ष्य है।
उनकी यह यात्रा साबित करती है कि सफलता बड़े निवेश से नहीं, बल्कि ईमानदार सोच, मेहनत और इंसानियत से मिलती है।
भावेश शेलके की मेहनत, समर्पण और सामाजिक सोच को पहचान मिली है। उन्हें “Maharashtra Business Icon 2025 / Maharashtra Style Icon 2025 / Maharashtra Fashion Icon 2025” जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों के लिए चुना गया है।
यह सम्मान Reseal.in और India Fashion Icon Magazine द्वारा दिया जा रहा है, जो महाराष्ट्र के उभरते उद्यमियों, कलाकारों और क्रिएटिव प्रोफेशनल्स को राष्ट्रीय मंच प्रदान करता है।
यह उपलब्धि न केवल भावेश शेलके के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का क्षण है।
इस भव्य पुरस्कार समारोह में कई प्रसिद्ध फिल्मी हस्तियाँ शिरकत करेंगी, जिनमें प्रमुख नाम हैं—
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वरिष्ठ अभिनेत्री सुश्री वर्षा उसगांवकर
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अभिनेत्री सोनाली कुलकर्णी
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अभिनेत्री प्रार्थना बेहरे
अनुभवी नेतृत्व में आयोजन
इस कार्यक्रम का आयोजन Reseal.in (Sure Me Multipurpose Pvt. Ltd.) के संस्थापक एवं CEO
श्री सुधीर कुमार पठाडे के नेतृत्व में किया जा रहा है, जो महाराष्ट्र के उभरते उद्यमियों और क्रिएटिव टैलेंट को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए लगातार कार्यरत हैं।








