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सुप्रीम कोर्ट दिनांक 15 जनवरी 2026 को अन्वेषण निदेशालय (ED) द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें आरोप लगाया गया है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य प्रशासन ने I-PAC छापेमारी मामले में जांच में हस्तक्षेप और बाधा पैदा की।
मामला क्या है?
ED ने आरोप लगाया है कि 8 जनवरी 2026 को कोलकाता में राजनीतिक सलाहकार फर्म I-PAC और उसके निदेशक प्रतिक जैन के निवास पर छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जांच अधिकारियों के काम में व्यवधान डालने, महत्वपूर्ण दस्तावेज़ और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस हटाने, और जांच का मार्गदर्शन प्रभावित करने के प्रयास किए।
याचिका में यह भी दावा किया गया है कि ममता बनर्जी की उपस्थिति जांच अधिकारियों पर डर पैदा कर रही थी और इससे एजेंसी के स्वतंत्र निष्पादन क्षमता पर गंभीर प्रभाव पड़ा। ED ने CBI से स्वतंत्र जांच कराने का भी अनुरोध सुप्रीम कोर्ट से किया है।
पहले क्या हुआ?
इससे पहले ED ने 9 जनवरी को कलकत्ता हाई कोर्ट में भी याचिका दाखिल की थी, जिसमें सीबीआई जांच की मांग की गई थी, पर सुनवाई बाद में स्थगित कर दी गई थी। वहीं, हाई कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस द्वारा दायर एक अलग याचिका को यह कहते हुए निस्तारित कर दिया कि ED ने I-PAC के कार्यालय या प्रतिक जैन के घर से कोई सामग्री जब्त नहीं की।
विवाद और आरोप-प्रत्यारोप
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ED ने यह आरोप लगाया है कि मुख्य अभियुक्त के साथ पुलिस की मदद से ममता बनर्जी ने जांच सामग्री को हटाया और जांच को प्रभावित किया।
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तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने ED पर अधिकारी-अतिक्रमण और राजनीतिक डेटा पर नज़र डालने का आरोप लगाया, यह कहते हुए कि यह कार्रवाई चुनावी रणनीति डेटा हासिल करने का प्रयास थी, न कि एक सच्ची जांच।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह मामला उस समय उभर रहा है जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव कुछ ही महीनों में होने वाले हैं, जिससे यह विवाद राजनीतिक रूप से और अधिक सघन हो गया है।








