प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोवा में आयोजित भारत ऊर्जा सप्ताह 2026 के दौरान देश की ऊर्जा सेक्टर को स्वतंत्र और सशक्त बनाने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना का खुलासा किया है। इस योजना के तहत भारत अगले कुछ वर्षों में तेल और गैस ड्रिलिंग तथा समर्पित निवेश को $100 बिलियन (करीब ₹8 लाख करोड़) तक आकर्षित करने का लक्ष्य रख रहा है, जिसका उद्देश्य देश के तेल आयात पर निर्भरता को कम करना है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ऊर्जा क्षेत्र में खोज और उत्पादन गतिविधियों का विस्तार कर रहा है और अब तक लगभग 170 से अधिक ब्लॉकों को ड्रिलिंग के लिए आवंटित किया गया है। साथ ही, ऐसे क्षेत्रों को भी शामिल किया जा रहा है जो पहले प्रतिबंधित थे, जिससे ऊर्जा कंपनियों को नई संभावनाएँ मिलेंगी।
मोदी ने बताया कि देश अपनी रिफाइनिंग क्षमता को भी बढ़ा रहा है — वर्तमान में लगभग 6 मिलियन बैरल प्रति दिन — ताकि घरेलू उत्पादन और परिष्करण क्षमता में वृद्धि हो सके। इससे भारत का ऊर्जा ढांचा मजबूत होगा और दामों तथा आपूर्ति जोखिम से निपटने में मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बड़े निवेश से न सिर्फ औद्योगिक उत्पादकता और ऊर्जा सुरक्षा में सुधार होगा, बल्कि विदेशी मुद्रा पर दबाव भी कम होगा, क्योंकि भारत वर्तमान में अपनी कुल तेल खपत का लगभग 90 % आयात पर निर्भर है।
इस पहल का एक बड़ा हिस्सा अंडमान और निकोबार बेसिन जैसे समुद्री क्षेत्रों में अपार संभावनाओं की खोज है, जो भविष्य में तेल और गैस संसाधनों के नए स्रोत साबित हो सकते हैं।
सरकार उम्मीद कर रही है कि यह रणनीति 2030 तक भारत के ऊर्जा ढांचे को स्थिरता और आत्मनिर्भरता की ओर ले जाएगी, जिससे देश को वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों में प्रतिस्पर्धा करने में भी मदद मिलेगी।








