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भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हाल ही में हुए मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement-FTA) ने भारतीय फार्मा और मेडिकल टेक्नोलॉजी (MedTech) उद्योग के लिए एक विशाल $572.3 बिलियन (लगभग ₹47 लाख करोड़) के बाजार के दरवाज़े खोल दिए हैं। इस समझौते को सरकार और उद्योग विशेषज्ञ भारत-EU संबंधों में एक बड़े आर्थिक अवसर के रूप में देख रहे हैं।
इस समझौते के तहत भारतीय दवा और चिकित्सा उपकरण कंपनियों को यूरोपीय संघ के बड़े, विकसित और उच्च गुणवत्ता वाले बाजार में प्राथमिकता-आधारित पहुँच मिलेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे भारत की वैश्विक आपूर्ति-शृंखला में भागीदारी और निर्यात क्षमता दोनों में वृद्धि होगी।
सरकार ने बताया है कि इस FTA से न केवल बड़े निर्यात अवसर मिलेंगे, बल्कि MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) और अन्य छोटे उद्योगों को भी फ़ायदा होगा, साथ ही उद्योग में कौशल-आधारित रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। कई प्रमुख विनिर्माण केंद्र जैसे गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र-प्रदेश भी इस समझौते से सीधा लाभ उठा सकते हैं।
व्यापार विश्लेषकों के अनुसार, समझौते के तहत टैरिफ में कटौती और बाज़ार पहुँच में आसाऩी से भारतीय जेनरिक्स, API (क्रियाशील दवा अवयव), बायोसिमिलर और उच्च-मूल्य वाली स्वास्थ्य सेवाओं का यूरोपीय बाज़ार में विस्तार संभव है। इससे दवा और चिकित्सा उपकरणों के निर्यात को मजबूती मिलेगी और भारत का वैश्विक स्वास्थ्य उपकरण क्षेत्र में स्थान और प्रबल होगा।
हालाँकि उद्योग विशेषज्ञ इस बात पर भी ज़ोर दे रहे हैं कि यूरोपीय बाजार की सख्त गुणवत्ता-नियमन और अनुपालन आवश्यकताओं को पूरा करना भारतीय निर्माताओं के लिए चुनौती हो सकता है। समझौते के सकारात्मक प्रभाव तभी पूरे रूप से दिखाई देंगे जब कंपनियाँ अपनी गुणवत्ता, परीक्षण और दस्तावेज़ीकरण प्रणालियों को मजबूत कर सकें।
कुल मिलाकर यह समझौता भारतीय फ़ार्मा और मेडटेक उद्योग के लिए एक नया आर्थिक अध्याय खोलता है, जिससे वैश्विक व्यापार में भारत की हिस्सेदारी और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को बढ़ावा मिलेगा।








