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भारत की ऑटोमोबाइल उद्योग ने निर्यात के क्षेत्र में उल्लेखनीय उछाल दर्ज किया है, जो यह दर्शाता है कि दुनिया भर के बाजार “Made in India” वाहनों को तेजी से स्वीकार कर रहे हैं। यह जानकारी आर्थिक सर्वे 2025-26 में सामने आई है, जिसे संसद में पेश किया गया है।
आर्थिक सर्वे के मुताबिक वित्त वर्ष 2024-25 में भारत से कुल 53 लाख से अधिक वाहन विभिन्न देशों में भेजे गए, जिनमें पैसेंजर व्हीकल, कमर्शियल व्हीकल, दो-पहियों और तीन-पहियों सभी शामिल हैं। साथ ही 2025-26 की पहली छमाही में भी डबल-डिजिट ग्रोथ देखने को मिली है, जो निर्यात में मजबूत मांग को दर्शाती है।
क्यों बढ़ रहा निर्यात?
यह विस्तार भारत के ऑटो उद्योग की निर्माण क्षमता, गुणवत्ता सुधार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को दिखाता है। पिछले दशक में वाहन उत्पादन में लगभग 33 % की वृद्धि हुई है, जिससे भारत अब दुनिया के सबसे बड़े दो-पहिया और तीन-पहिया बाजार के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है, और पैसेंजर व कमर्शियल वाहन क्षेत्र में भी वैश्विक स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा बाजार बन चुका है।
विशेष रूप से पैसेंजर व्हीकल और दो-पहिया सेगमेंट निर्यात में उछाल के मुख्य चालक रहे हैं, जिनमें मारुति सुजुकी, हुंडई, बजाज ऑटो, टीवीएस मोटर और हीरो मोटोकॉर्प जैसी कंपनियों ने अपनी वाहनों की मांग विदेशों में बढ़ाई है।
उद्योग के लाभ
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निर्यात के साथ उत्पादन और घरेलू बिक्री दोनों में मजबूती बनी हुई है।
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ऑटोमोबाइल सेक्टर करीब 3 करोड़ लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार देता है और लगभग 15 % जीएसटी संग्रह में योगदान करता है।
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सरकार की PLI स्कीम, इलेक्ट्रिक वाहन योजनाएँ और अन्य समर्थन नीतियाँ भी उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मदद कर रही हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह का निर्यात प्रदर्शन न केवल भारत को एक प्रमुख वैश्विक उत्पादन केंद्र के रूप में स्थापित करता है, बल्कि भविष्य में अधिक विदेशी मांग और निवेश को भी आकर्षित करेगा।








