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अमेरिकी अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन NASA के मंगल ग्रह पर काम कर रहे रोवर Curiosity ने ग्रह की सतह पर एक अद्वितीय, “कोरल (मूंगा)” जैसे आकार वाली चट्टान की तस्वीर भेजी है, जो वैज्ञानिकों के लिए प्राचीन पानी के अस्तित्व के और सबूत पेश करती है। यह खोज मंगल की भूगर्भीय इतिहास को समझने के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
क्या मिली?
Curiosity ने Gale Crater के क्षेत्र में मिली यह चट्टान केवल कुछ सेमी चौड़ी है, लेकिन इसकी आकृति समुद्री कोरल जैसे पैटर्न की याद दिलाती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इसका आकार सत्य में जीवित कोरल नहीं, बल्कि भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं का परिणाम है।
प्राचीन पानी का संकेत
वैज्ञानिकों के अनुसार इस प्रकार की संरचनाएँ तब बनती हैं जब तरल पानी पुरानी मिट्टी और पत्थरों के बीच बहता है, जिसमें घुलित खनिज भर जाते हैं। जैसे ही पानी सूखता है, ये खनिज कठोर रूप धारण करते हैं — इसके बाद अरबों सालों में हवा द्वारा घिसाव से आसपास के नरम पत्थर मिट जाता है और मिनरल‑भरपूर संरचना बच जाती है। इसी प्रक्रिया से यह “कोरल‑समान” आकार सामने आया।
NASA ने स्पष्ट किया है कि यह खोज जीवन के प्रमाण नहीं, बल्कि प्राचीन जल‑गतिविधियों के संकेत के रूप में देखी जा रही है — इससे यह पुख्ता होता है कि मंगल ग्रह के इतिहास में कहीं न कहीं तरल पानी मौजूद रहा होगा।
क्यों यह महत्वपूर्ण है?
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यह चट्टान मंगल के भूतपूर्व वातावरण का संकेत देती है जहाँ पानी बहता था।
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Curiosity द्वारा ली गई यह छवि मंगल की भूवैज्ञानिक धरोहर को समझने में मदद करती है।
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शोधकर्ताओं को यह सोचने पर मजबूर करती है कि कभी ग्रह की सतह पर उथले पानी मौजूद था, जिससे जीवन के अनुकूल स्थितियों के बारे में नए प्रश्न उठते हैं।
Curiosity का यह मिशन मंगल के वातावरण, सतह और भूगर्भीय इतिहास की खोज में लगभग देर से डेढ़ दशक से अधिक समय से जुटा हुआ है, और छोटी‑छोटी खोजें भी ग्रह विज्ञान को बड़े स्तर पर आगे बढ़ा रही हैं।








