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महाराष्ट्र में 11 मार्च का दिन स्वराज्य के महान योद्धा Chhatrapati Sambhaji Maharaj के अद्वितीय बलिदान की स्मृति में “बलिदान दिवस” के रूप में मनाया जाता है। वर्ष 1689 में मुगल सम्राट Aurangzeb की कैद में अमानवीय यातनाएँ सहने के बावजूद स्वराज्य और धर्म के प्रति अडिग रहने वाले इस महान राजा को आज पूरे महाराष्ट्र में भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी जा रही है।
राज्य के विभिन्न शहरों और गांवों में इस अवसर पर श्रद्धांजलि सभाएँ, पदयात्राएँ, इतिहास व्याख्यान और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। हजारों की संख्या में शिवभक्त और इतिहासप्रेमी इन कार्यक्रमों में शामिल होकर शंभूराजे के शौर्य और त्याग को नमन कर रहे हैं।
तुळापुर और वढू बुद्रुक में विशेष कार्यक्रम
पुणे जिले के ऐतिहासिक स्थान Tulapur और Vadhu Budruk में आज विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। भीमा और इंद्रायणी नदियों के संगम पर स्थित तुळापुर वही स्थान है जहां संभाजी महाराज की हत्या की गई थी, जबकि वढू बुद्रुक में उनका अंतिम संस्कार किया गया था।
आज इन दोनों स्थानों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ देखने को मिली। हजारों लोग महाराज की स्मृति में नतमस्तक होने के लिए पहुंचे। प्रशासन की ओर से सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
‘बलिदान मास’ की परंपरा
संभाजी महाराज ने औरंगजेब की कैद में लगभग 40 दिनों तक अत्यंत कठोर यातनाएँ सहन की थीं। उसी स्मृति को जीवित रखने के लिए कई शिवभक्त इन दिनों को “बलिदान मास” के रूप में मनाते हैं।
इस अवधि में कई लोग नंगे पैर चलना, जमीन पर सोना और मिठाई या मीठे भोजन का त्याग करना जैसे कठिन व्रत रखते हैं। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को इतिहास की इस महान घटना और महाराज के त्याग के बारे में जागरूक करना है।
वीरता के साथ विद्वता का भी प्रतीक
छत्रपति संभाजी महाराज केवल पराक्रमी योद्धा ही नहीं थे, बल्कि अत्यंत विद्वान भी थे। उन्होंने मात्र 14 वर्ष की आयु में संस्कृत में “बुधभूषण” नामक ग्रंथ की रचना की थी।
अपने नौ वर्ष के शासनकाल में उन्होंने मुगलों, पुर्तगालियों और सिद्दियों जैसे कई शक्तिशाली शत्रुओं का एक साथ सामना किया और स्वराज्य की रक्षा की। इतिहासकारों का मानना है कि संभाजी महाराज के पराक्रम के कारण ही औरंगजेब का दक्कन पर पूर्ण नियंत्रण का सपना कभी पूरा नहीं हो सका।
सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि
बलिदान दिवस के अवसर पर सोशल मीडिया पर भी शंभूराजे को श्रद्धांजलि देने का सिलसिला जारी है। लोग उनके शौर्य और त्याग को याद करते हुए संदेश और पोस्ट साझा कर रहे हैं।
कुछ लोकप्रिय श्रद्धांजलि संदेश:
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“देह भले समाप्त हो गया, लेकिन जिनके विचार अमर हैं – ऐसे धर्मवीर संभाजी महाराज को शत-शत नमन।”
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“जिनके शौर्य की गूंज आज भी सह्याद्री की पर्वतमालाओं में सुनाई देती है, उन स्वराज्यरक्षक संभाजी महाराज को विनम्र अभिवादन।”
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“मृत्यु सामने होने पर भी जिन्होंने स्वराज्य और धर्म का साथ नहीं छोड़ा, ऐसे शंभूराजे को कोटि-कोटि प्रणाम।”
प्रेरणा का अमर स्रोत
छत्रपति संभाजी महाराज का बलिदान भारतीय इतिहास में साहस, स्वाभिमान और राष्ट्रनिष्ठा का अद्वितीय उदाहरण है। उनका जीवन आज भी युवाओं को अपने कर्तव्य, देशभक्ति और आत्मसम्मान के लिए प्रेरित करता है।
बलिदान दिवस के इस अवसर पर पूरा महाराष्ट्र धर्मवीर शंभूराजे की स्मृति को नमन करते हुए उनके आदर्शों को याद कर रहा है।








