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नोएडा में सोमवार को मजदूरों का वेतन वृद्धि को लेकर किया गया प्रदर्शन अचानक हिंसक रूप ले बैठा, जिससे पूरे औद्योगिक क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। सेक्टर-60 और फेज-2 इलाके में प्रदर्शनकारियों द्वारा वाहनों में आगजनी, पत्थरबाजी और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, बड़ी संख्या में फैक्ट्री मजदूर अपने लंबे समय से लंबित वेतन वृद्धि की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे थे। शुरुआत में यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, लेकिन कुछ ही देर में स्थिति बिगड़ गई और हिंसा फैलने लगी।
प्रदर्शन के दौरान कुछ उपद्रवियों ने वाहनों को निशाना बनाया और कम से कम एक कार को आग के हवाले कर दिया। इसके अलावा कई वाहनों और संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया। पत्थरबाजी की घटनाएं भी सामने आईं, जिससे इलाके में दहशत का माहौल बन गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अचानक भीड़ उग्र हो गई और पुलिस पर भी पत्थर फेंके गए। इससे स्थिति को नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण हो गया।
इस हिंसक प्रदर्शन का असर पूरे शहर के ट्रैफिक पर पड़ा। कई प्रमुख मार्गों पर जाम की स्थिति बन गई और लोगों को घंटों तक परेशानी का सामना करना पड़ा। खासकर सेक्टर-62 और चिल्ला बॉर्डर जैसे इलाकों में यातायात पूरी तरह प्रभावित हुआ।
ऑफिस जाने वाले लोगों और आम यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा, जिससे सोमवार की सुबह की दिनचर्या पूरी तरह प्रभावित हो गई।
जानकारी के मुताबिक, मजदूर लंबे समय से वेतन बढ़ाने, बेहतर कार्य परिस्थितियां और अन्य सुविधाओं की मांग कर रहे थे। यह विरोध पिछले कुछ दिनों से जारी था, लेकिन सोमवार को यह उग्र रूप में सामने आया।
कुछ रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि मजदूर हरियाणा के बराबर वेतन और सुविधाओं की मांग कर रहे हैं, जिससे असंतोष बढ़ता जा रहा था।
घटना के बाद पुलिस और प्रशासन ने तुरंत मोर्चा संभाला और प्रभावित इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया। अधिकारियों के अनुसार, स्थिति अब नियंत्रण में है और लगातार निगरानी की जा रही है।
प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति बनाए रखने की अपील की है। साथ ही, प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर स्थिति सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने मजदूरों की मांगों को ध्यान में रखते हुए कुछ राहत उपायों की घोषणा भी की है। इनमें साप्ताहिक अवकाश, ओवरटाइम के लिए डबल भुगतान और चिकित्सा सुविधाएं शामिल हैं।
इस घटना ने एक बार फिर औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों की स्थिति और उनकी मांगों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो इस तरह की घटनाएं भविष्य में और बढ़ सकती हैं।








