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  • सिगरेट और गांजा से दिमाग पर गंभीर असर: नई स्टडी में ब्रेन सिकुड़ने का दावा, युवाओं के लिए चेतावनी

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    आज की तेज़ रफ्तार और तनावपूर्ण जीवनशैली में युवाओं के बीच धूम्रपान और नशीले पदार्थों का सेवन तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन हाल ही में प्रकाशित एक शोध ने इस आदत के खतरनाक परिणामों को उजागर करते हुए चिंता बढ़ा दी है। Addiction Journal में प्रकाशित इस स्टडी के अनुसार, सिगरेट और गांजा का नियमित सेवन मस्तिष्क की संरचना को प्रभावित कर सकता है और “ब्रेन श्रिंक” यानी दिमाग के सिकुड़ने जैसी गंभीर समस्या पैदा कर सकता है।

    शोधकर्ताओं के अनुसार, तंबाकू और गांजा जैसे न्यूरोएक्टिव पदार्थ सीधे तौर पर मस्तिष्क की कोशिकाओं और उनके संचार तंत्र को नुकसान पहुंचाते हैं। अध्ययन में पाया गया कि जो लोग नियमित रूप से धूम्रपान करते हैं, उनके दिमाग के महत्वपूर्ण हिस्से ‘ग्रे मैटर’ (Gray Matter) का घनत्व कम हो जाता है। यह वही हिस्सा है जो सोचने, समझने, निर्णय लेने और याददाश्त से जुड़ा होता है। इसके कमजोर होने से व्यक्ति की मानसिक क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

    शोध में यह भी सामने आया है कि गांजा सेवन करने वालों के मस्तिष्क के ‘अमिगडाला’ (Amygdala) क्षेत्र में भी बदलाव देखे गए हैं। अमिगडाला दिमाग का वह भाग है जो भावनाओं और व्यवहार को नियंत्रित करता है। अध्ययन के दौरान कुछ मामलों में इसका आकार छोटा पाया गया, जो मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरे का संकेत हो सकता है। हालांकि, वैज्ञानिकों ने यह भी स्पष्ट किया है कि गांजे का प्रभाव हर व्यक्ति में समान नहीं होता, लेकिन इसके जोखिम को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    इस शोध में आधुनिक विश्लेषण पद्धतियों जैसे क्रॉस-सेक्शनल, लॉन्गिट्यूडिनल और मेंडेलियन रैंडमाइजेशन (MR) का उपयोग किया गया, जिससे परिणामों की विश्वसनीयता और मजबूत हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के डेटा से यह स्पष्ट होता है कि नशे की आदतें केवल अस्थायी नुकसान नहीं पहुंचातीं, बल्कि लंबे समय में मस्तिष्क की संरचना को स्थायी रूप से प्रभावित कर सकती हैं।

    विशेषज्ञों ने एक और महत्वपूर्ण चेतावनी दी है कि यदि कोई व्यक्ति सिगरेट और गांजा दोनों का एक साथ सेवन करता है, तो यह स्थिति और अधिक खतरनाक हो जाती है। इस “डेडली कॉम्बिनेशन” से मस्तिष्क कोशिकाओं का नुकसान तेजी से बढ़ सकता है और मानसिक गिरावट की प्रक्रिया तेज हो सकती है। इसके अलावा, यह आदतें कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों और कम जीवन प्रत्याशा से भी जुड़ी पाई गई हैं।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि युवाओं में बढ़ती यह प्रवृत्ति बेहद चिंताजनक है, क्योंकि कई लोग इसे “ट्रेंड” या “स्ट्रेस रिलीफ” का माध्यम मानते हैं, जबकि वास्तव में यह धीरे-धीरे उनकी मानसिक और शारीरिक सेहत को नुकसान पहुंचा रही होती है। समय के साथ यह समस्या डिमेंशिया, अवसाद और अन्य मानसिक विकारों का कारण बन सकती है।

    इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य लोगों को नशे के इन छिपे हुए खतरों के प्रति जागरूक करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इन आदतों को नहीं छोड़ा गया, तो इसके दीर्घकालिक परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं। इसलिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाना, नियमित व्यायाम करना और मानसिक तनाव को नियंत्रित करने के लिए सकारात्मक उपाय अपनाना बेहद जरूरी है।

    अंततः, यह शोध एक चेतावनी के रूप में सामने आया है कि सिगरेट और गांजा जैसे नशीले पदार्थ केवल तात्कालिक राहत नहीं देते, बल्कि भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकते हैं। जागरूकता और सतर्कता ही इस खतरे से बचने का सबसे प्रभावी उपाय है।
    यह समाचार विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और उपलब्ध शोध पर आधारित है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या या निर्णय के लिए विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।

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