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  • बागलाण: पवन रामदास काकुळते ने शिक्षा के क्षेत्र में रची नई पहचान, ‘ध्येय क्लास’ बना सफलता का केंद्र

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    ग्रामीण क्षेत्र से निकलकर शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाना आसान नहीं होता, लेकिन पवन रामदास काकुळते ने अपने समर्पण, मेहनत और दूरदृष्टि के बल पर यह कर दिखाया है। रामकृष्ण शैक्षणिक बहुउद्देशीय संस्था के माध्यम से उन्होंने न केवल शिक्षा का प्रसार किया, बल्कि सैकड़ों छात्रों के जीवन को नई दिशा दी।

    पवन काकुळते का जन्म 26 जनवरी 1989 को किकवारी खुर्द (बागलाण तालुका) में हुआ। साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से आने के बावजूद उन्होंने अपने जीवन में शिक्षा को प्राथमिकता दी। प्रारंभिक से लेकर उच्च माध्यमिक शिक्षा उन्होंने बागलाण में ही पूरी की और आगे चलकर डी.एड., एम.ए. तथा बी.एड. जैसी डिग्रियां हासिल कीं।

    सरकारी नौकरी की दिशा में आगे बढ़ने के बजाय उन्होंने कुछ अलग करने का निर्णय लिया। उन्होंने महसूस किया कि ग्रामीण क्षेत्र के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सही मार्गदर्शन की आवश्यकता है। इसी सोच के साथ उन्होंने सटाणा में ‘ध्येय क्लास’ की शुरुआत की। शुरुआत में केवल तीन छात्रों के साथ पांचवीं कक्षा का क्लास शुरू हुआ, लेकिन उनकी मेहनत और समर्पण के कारण धीरे-धीरे यह संख्या बढ़ती गई।

    आज ‘ध्येय क्लास’ एक बड़ा शिक्षण केंद्र बन चुका है, जहां सैकड़ों छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। यहां केवल अकादमिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि अनुशासन, आत्मनिर्भरता और सामाजिक जिम्मेदारी भी सिखाई जाती है। उनके कई छात्र आज देश-विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जो उनकी सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण है।

    पवन काकुळते का योगदान केवल कोचिंग क्लास तक सीमित नहीं है। उन्होंने विभिन्न शैक्षणिक और सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय भागीदारी निभाई है। उन्होंने ग्रामीण छात्रों के लिए एसटी पास सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रयास किए, जिससे दूरदराज के विद्यार्थी भी शिक्षा प्राप्त कर सकें।

    इसके अलावा, उन्होंने छात्रों के लिए मुफ्त कार्यशालाएं आयोजित कीं, जिनमें इंग्लिश स्पीकिंग और कंप्यूटर ट्रेनिंग जैसे विषय शामिल थे। विशेष रूप से उन्होंने 180 छात्रों के लिए दो महीने की कार्यशाला आयोजित कर उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया और उनके डर को दूर किया।

    सामाजिक कार्यों में भी उनका योगदान सराहनीय है। वे नियमित रूप से रक्तदान, वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण जैसे कार्यों में भाग लेते हैं। उन्होंने कंधाणे गांव के पास वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश दिया है।

    पवन काकुळते को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। इनमें राज्यस्तरीय आदर्श शिक्षक पुरस्कार, महाराष्ट्र रत्न पुरस्कार और अन्य सम्मान शामिल हैं। यह पुरस्कार उनके समर्पण और समाज के प्रति योगदान को दर्शाते हैं।

    आज वे न केवल एक शिक्षक, बल्कि एक मार्गदर्शक और प्रेरणास्त्रोत बन चुके हैं। उनकी संस्था के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई भी छात्र शिक्षा से वंचित न रहे।

    पवन काकुळते की यह यात्रा यह साबित करती है कि यदि उद्देश्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो सीमित संसाधनों में भी बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं। उनका जीवन हर उस युवा के लिए प्रेरणा है, जो शिक्षा के माध्यम से समाज में बदलाव लाना चाहता है।

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