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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों में बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिल रहा है। शुरुआती रुझानों के अनुसार भारतीय जनता पार्टी राज्य में ऐतिहासिक जीत की ओर बढ़ रही है, जबकि तृणमूल कांग्रेस को 15 वर्षों बाद सत्ता से बाहर होना पड़ सकता है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिला। भाजपा की ओर से इस चुनाव में प्रमुख चेहरा सुवेंदु अधिकारी रहे, जिन्होंने इस बार चुनावी लड़ाई को और तीखा बना दिया।
इस चुनाव में कांग्रेस और वाम दल भी मैदान में रहे, लेकिन मुकाबला मुख्य रूप से भाजपा और तृणमूल के बीच ही केंद्रित रहा। राजनीतिक समीकरणों में एक नया मोड़ तब आया जब निलंबित तृणमूल विधायक हुमायूं कबीर ने अपनी अलग पार्टी बनाकर चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया।
राज्य में मतदान दो चरणों—23 और 29 अप्रैल—को संपन्न हुआ, जबकि कुछ क्षेत्रों में पुनर्मतदान भी कराया गया। चुनावी प्रक्रिया के दौरान विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत मतदाता सूची में बड़े स्तर पर बदलाव भी चर्चा का विषय रहा।
294 सदस्यीय विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 148 सीटों का बहुमत आवश्यक है। वर्ष 2021 के चुनावों में तृणमूल कांग्रेस ने 215 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी, जबकि भाजपा ने 77 सीटों के साथ मुख्य विपक्षी दल के रूप में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई थी।
इस बार भवानीपुर सीट पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, जहां मुकाबला काफी दिलचस्प माना जा रहा है। इससे पहले 2021 में ममता बनर्जी को नंदीग्राम में सुवेंदु अधिकारी से हार का सामना करना पड़ा था, हालांकि बाद में उन्होंने उपचुनाव जीतकर विधानसभा में वापसी की थी।
इस बार का चुनाव विचारधाराओं, विकास के वादों और बदलाव की मांग के बीच लड़ा गया, जिसमें पूरे राज्य में जबरदस्त राजनीतिक गर्मी देखने को मिली।
यदि रुझान परिणामों में बदलते हैं, तो यह पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ साबित होगा, जहां पहली बार राज्य में भाजपा की सरकार बन सकती है।








