प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से पेट्रोल-डीजल का कम इस्तेमाल करने, सोने की खरीदारी टालने और वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने की अपील के बाद देशभर में चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच महाराष्ट्र सरकार में मंत्री छगन भुजबळ ने इस मुद्दे पर सावधानी भरी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आने वाले दिनों में वैश्विक हालात किस दिशा में जाएंगे, यह कहना मुश्किल है।
छगन भुजबळ ने कहा कि दुनिया इस समय गंभीर अस्थिरता और ऊर्जा संकट के दौर से गुजर रही है। अमेरिका-ईरान तनाव, पश्चिम एशिया की स्थिति और पेट्रोलियम पदार्थों की बढ़ती कीमतों ने कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और यहां तक कि जापान जैसे देशों में भी ऊर्जा संकट के असर दिखाई दे रहे हैं।
भुजबळ ने कहा, “हमने दुनिया के कई देशों की स्थिति का अध्ययन किया है। पहले भी कई बार पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी देखी गई है। लेकिन आज भारत जिस मजबूती से खड़ा है, उसका बड़ा कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार की रणनीति है।”
उन्होंने कहा कि पहले भारत सीमित देशों से ही ईंधन आयात करता था, लेकिन अब 40 से 45 देशों से डीजल और पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद की जा रही है। इसी वजह से भारत वैश्विक संकट के बावजूद अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में बना हुआ है।
हालांकि, भुजबळ ने यह भी स्वीकार किया कि आने वाले समय में सामान्य परिस्थितियां बनाए रखना आसान नहीं होगा। उन्होंने कहा, “यह कहना कठिन है कि अगले कुछ दिनों में हालात कहां तक जाएंगे। ईरान-अमेरिका युद्ध रुकने की बातें होती हैं, लेकिन फिर तनाव बढ़ जाता है। पूरी दुनिया में अनिश्चितता और भ्रम की स्थिति बनी हुई है।”
मंत्री ने कहा कि ऐसे समय में हर देश को खुद को संभालने की जरूरत है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की अपील को जिम्मेदार और समय के अनुसार आवश्यक कदम बताया। भुजबळ के अनुसार, ईंधन की बचत और विदेशी मुद्रा संरक्षण जैसे उपाय देश को संभावित आर्थिक दबाव से बचाने में मदद कर सकते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में देशवासियों से अपील की थी कि वे गैर-जरूरी पेट्रोल-डीजल की खपत कम करें, सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करें, कार पूलिंग अपनाएं और जहां संभव हो वहां वर्क फ्रॉम होम को प्राथमिकता दें। इसके अलावा उन्होंने एक साल तक सोने की खरीदारी और विदेश यात्राओं से बचने की भी सलाह दी थी।
मोदी की इस अपील के बाद विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने इसे सरकार की आर्थिक नीतियों की विफलता बताया है। हालांकि भाजपा और उसके सहयोगी दल इसे देशहित में उठाया गया आवश्यक कदम बता रहे हैं।
छगन भुजबळ ने विपक्ष की आलोचनाओं पर सीधे प्रतिक्रिया देने से बचते हुए कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए सतर्क रहना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत अभी भी कई देशों की तुलना में बेहतर स्थिति में है और इसका श्रेय सरकार की दूरदर्शी नीतियों को जाता है।
ऊर्जा संकट और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच सरकार लगातार लोगों से संसाधनों के संयमित उपयोग की अपील कर रही है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां किस दिशा में जाती हैं, इस पर देश की आर्थिक रणनीति भी काफी हद तक निर्भर करेगी।








