तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय थलपति ने राज्य में शराब की दुकानों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने स्कूलों, धार्मिक स्थलों और बस अड्डों के आसपास स्थित 717 सरकारी शराब दुकानों को बंद करने का आदेश जारी किया है। सरकार ने इन दुकानों को बंद करने के लिए दो सप्ताह की समयसीमा तय की है। मुख्यमंत्री का यह फैसला राज्य में नशामुक्त और सुरक्षित सामाजिक वातावरण बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
तमिलनाडु देश के उन राज्यों में शामिल है जहां शराब की खपत काफी अधिक है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में करीब 1.32 करोड़ लोग शराब का सेवन करते हैं। इनमें लगभग 70 लाख लोग ऐसे हैं जो रोजाना शराब पीते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, तमिलनाडु में 29.2 प्रतिशत पुरुष और 0.4 प्रतिशत महिलाएं शराब का सेवन करती हैं।
हालांकि शराब की बिक्री और खपत के मामले में तमिलनाडु देश के शीर्ष राज्यों में शामिल है, लेकिन राजस्व के मामले में यह अपेक्षाकृत पीछे है। राज्य सरकार शराब बिक्री से करीब 7,262 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित करती है। तमिलनाडु में शराब बिक्री का संचालन मुख्य रूप से सरकारी संस्था TASMAC के जरिए किया जाता है।
मुख्यमंत्री विजय ने चुनाव प्रचार के दौरान “एंटी ड्रग प्रोटेक्शन जोन” बनाने का वादा किया था। उसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए अब सरकार ने स्कूलों, धार्मिक स्थलों और बस अड्डों से 500 मीटर के दायरे में स्थित शराब दुकानों को बंद करने का निर्णय लिया है। सरकार का मानना है कि इससे युवाओं और छात्रों पर नकारात्मक प्रभाव कम होगा और सार्वजनिक स्थान अधिक सुरक्षित बनेंगे।
तमिलनाडु शराब खपत के मामले में देश में पांचवें स्थान पर है। इस सूची में उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर है, जहां सबसे ज्यादा शराब की बिक्री होती है और राज्य को इससे सबसे अधिक राजस्व प्राप्त होता है। इसके बाद कर्नाटक, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश का स्थान आता है।
कर्नाटक में शराब से लगभग 20,950 करोड़ रुपये का राजस्व मिलता है। वहीं महाराष्ट्र में मुंबई, पुणे और नासिक जैसे बड़े शहरों में शराब की मांग लगातार बनी हुई है। मध्य प्रदेश में ग्रामीण इलाकों में शराब की खपत अधिक होने के कारण सरकार को बड़ा राजस्व प्राप्त होता है।
तमिलनाडु सरकार का यह फैसला सामाजिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। एक तरफ इसे युवाओं और समाज को नशे से दूर रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ शराब बिक्री से होने वाले राजस्व पर इसके असर को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
सरकार का कहना है कि आने वाले समय में राज्य में सार्वजनिक स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए और भी सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।








