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  • 50 साल से पहनी हुई है यह खास अंगूठी: अशोक सराफ ने बताया कैसे बदली किस्मत, ‘पांडू हवालदार’ से मिली थी सफलता की नई उड़ान

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    मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता अशोक सराफ न केवल अपने शानदार अभिनय बल्कि अपनी सादगी और दिलचस्प व्यक्तिगत किस्सों के लिए भी जाने जाते हैं। उनके जीवन से जुड़ी ऐसी ही एक कहानी उनकी उंगली में पिछले 50 वर्षों से मौजूद एक खास अंगूठी की है, जिसे उन्होंने आज तक कभी नहीं उतारा।

    अशोक सराफ के दाहिने हाथ की अनामिका में पहनी हुई यह अंगूठी वर्षों से लोगों का ध्यान आकर्षित करती रही है। इस अंगूठी से जुड़ा एक ऐसा दिलचस्प किस्सा है, जिसे स्वयं अभिनेता ने कई बार साझा किया है। उनके अनुसार यह सिर्फ एक आभूषण नहीं, बल्कि उनकी जिंदगी और करियर के अहम मोड़ की गवाह है।

    यह कहानी वर्ष 1974 की है, जब उनके मित्र और प्रसिद्ध मेकअप आर्टिस्ट विजय लवेकर कुछ विशेष डिजाइन की अंगूठियां लेकर स्टूडियो पहुंचे थे। विजय लवेकर सराफी का भी काम करते थे और उन्होंने अपने हाथों से कई सुंदर अंगूठियां तैयार की थीं। उन्होंने अशोक सराफ से कहा कि वे इनमें से अपनी पसंद की एक अंगूठी चुन लें।

    कई आकर्षक अंगूठियों के बीच चुनाव करना मुश्किल था, इसलिए अशोक सराफ ने बिना ज्यादा सोचे पहली अंगूठी उठा ली और उसे अपनी उंगली में पहन लिया। यह अंगूठी नटराज की आकृति से सुसज्जित थी। खास बात यह रही कि अंगूठी उनकी उंगली में बिल्कुल फिट बैठ गई, मानो विशेष रूप से उनके लिए ही बनाई गई हो।

    अशोक सराफ को यह अंगूठी इतनी पसंद आई कि उन्होंने उसी समय इसे अपनी स्थायी साथी बना लिया। इसके बाद जो हुआ, उसे वह आज भी अपनी जिंदगी का यादगार संयोग मानते हैं।

    अभिनेता के अनुसार, अंगूठी पहनने के महज तीन दिन बाद उन्हें मराठी सिनेमा की चर्चित फिल्म ‘पांडू हवालदार’ का प्रस्ताव मिला। उस समय तक उनका करियर संघर्ष के दौर से गुजर रहा था और उन्हें बड़ी सफलता का इंतजार था। लेकिन ‘पांडू हवालदार’ की सफलता ने उनकी किस्मत बदल दी और उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई।

    फिल्म की जबरदस्त लोकप्रियता के बाद अशोक सराफ ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। इसके बाद उन्होंने मराठी और हिंदी सिनेमा में कई यादगार भूमिकाएं निभाईं और मनोरंजन जगत के सबसे सम्मानित कलाकारों में शामिल हो गए।

    अशोक सराफ का कहना है कि इसे कोई श्रद्धा कहे या अंधविश्वास, लेकिन उन्होंने उसी समय तय कर लिया था कि यह अंगूठी कभी अपनी उंगली से नहीं उतारेंगे। यही कारण है कि पिछले पांच दशकों से यह अंगूठी उनके साथ है और उनके जीवन के हर महत्वपूर्ण पड़ाव की साक्षी बनी हुई है।

    आज भी अशोक सराफ इस अंगूठी को बेहद संभालकर रखते हैं। उनके लिए यह केवल धातु का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि दोस्ती, विश्वास, संघर्ष और सफलता की यादों से जुड़ा एक अनमोल प्रतीक है। यही वजह है कि 50 साल बाद भी यह अंगूठी उनकी पहचान का एक अभिन्न हिस्सा बनी हुई है।

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