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मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पत्र रद्द किए जाने के मामले में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट से उन्हें तत्काल राहत नहीं मिल सकी। सर्वोच्च न्यायालय ने मामले की तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि इस पर शुक्रवार को सुनवाई की जाएगी।
मीनाक्षी नटराजन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने न्यायालय के समक्ष मामले का उल्लेख करते हुए रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। उन्होंने दलील दी कि नामांकन प्रक्रिया की समयसीमा को देखते हुए न्यायालय का त्वरित हस्तक्षेप आवश्यक है।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई टाली
जस्टिस प्रशांत कुमार की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख किया गया। सुनवाई के दौरान सिंघवी ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (Representation of People Act) की धारा 33A का हवाला देते हुए कहा कि नामांकन रद्द करने का निर्णय न्यायोचित नहीं है और इस पर तत्काल रोक लगनी चाहिए।
हालांकि रिटर्निंग ऑफिसर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने इसका विरोध किया। दोनों पक्षों की प्रारंभिक दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि संबंधित कानून और पूर्व के न्यायिक निर्णय स्पष्ट हैं तथा मामले पर शुक्रवार को विस्तार से सुनवाई की जाएगी।
चुनाव आयोग से जवाब नहीं मिलने पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं
कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन ने चुनाव आयोग से शिकायत करने के बाद कोई संतोषजनक जवाब न मिलने पर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल बुधवार को चुनाव आयोग से मिला था, लेकिन आयोग की ओर से कोई निर्णय सामने नहीं आया।
इसके बाद नटराजन ने सर्वोच्च न्यायालय में रिट याचिका दाखिल कर रिटर्निंग ऑफिसर के आदेश पर रोक लगाने और अपने नामांकन को वैध घोषित करने की मांग की।
क्यों रद्द हुआ नामांकन?
राज्यसभा चुनाव के लिए दाखिल नामांकन पत्र के साथ उम्मीदवारों को फॉर्म-26 भरना अनिवार्य होता है। इस फॉर्म में उम्मीदवारों को अपने खिलाफ दर्ज सभी आपराधिक मामलों और लंबित मुकदमों की जानकारी देना आवश्यक होता है।
रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा के अनुसार मीनाक्षी नटराजन ने फॉर्म-26 में तेलंगाना में लंबित एक मामले की जानकारी नहीं दी थी। इसी आधार पर उनका नामांकन पत्र खारिज कर दिया गया।
निर्वाचन नियमों के अनुसार फॉर्म-26 का कोई भी कॉलम खाली नहीं छोड़ा जा सकता। यदि किसी मामले का अस्तित्व नहीं है तो उम्मीदवार को ‘शून्य’ या ‘लागू नहीं’ लिखना होता है। अधिकारियों का कहना है कि आवश्यक जानकारी के अभाव में नामांकन को वैध नहीं माना जा सकता।
राजनीतिक और कानूनी नजरें अब शुक्रवार की सुनवाई पर
राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया के बीच यह मामला राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कांग्रेस इस फैसले को चुनौती दे रही है, जबकि चुनाव अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह नियमों के अनुसार की गई है।
अब सभी की निगाहें शुक्रवार को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि रिटर्निंग ऑफिसर के आदेश में हस्तक्षेप किया जाए या नहीं। इस निर्णय का असर मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव की राजनीतिक तस्वीर पर भी पड़ सकता है।








