शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) में छह सांसदों की बगावत के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। बागी सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने की चर्चाओं के बीच अब उद्धव ठाकरे गुट ने उनके खिलाफ कानूनी मोर्चा खोलने का फैसला किया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत ने स्पष्ट किया है कि बागी सांसदों को अयोग्य घोषित कराने के लिए सभी संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जाएगा।
गुरुवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में संजय राउत ने कहा कि पार्टी संसदीय दल की बैठक में केवल तीन सांसद ही उपस्थित हुए, जबकि छह सांसद अनुपस्थित रहे। इन सभी सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर जवाब देने का समय दिया गया है।
संसदीय दल की बैठक में पहुंचे केवल तीन सांसद
संजय राउत ने बताया कि गुरुवार को हुई संसदीय दल की बैठक में केवल अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे उपस्थित रहे। बाकी छह सांसद बैठक में शामिल नहीं हुए। पार्टी ने उनकी अनुपस्थिति को गंभीरता से लेते हुए सभी को नोटिस जारी किया है।
राउत ने कहा कि पार्टी अनुशासन का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ संगठनात्मक और कानूनी दोनों स्तरों पर कार्रवाई की जाएगी।
अयोग्यता के लिए शुरू होगी कानूनी प्रक्रिया
संजय राउत ने कहा कि बागी सांसदों को अयोग्य घोषित कराने की पूरी तैयारी कर ली गई है। उन्होंने कहा कि सबसे पहले लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जाएगी। यदि वहां उचित कार्रवाई नहीं होती है तो पार्टी सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी।
उन्होंने विश्वास जताया कि यदि लोकसभा अध्यक्ष संविधान, दल-बदल विरोधी कानून और सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार निर्णय लेते हैं, तो बागी सांसदों की सदस्यता समाप्त हो सकती है।
सड़क से लेकर अदालत तक लड़ेगी लड़ाई
राउत ने कहा कि यह केवल राजनीतिक संघर्ष नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की लड़ाई भी है। उन्होंने कहा कि पार्टी सड़क पर भी आंदोलन करेगी और अदालत में भी पूरी मजबूती के साथ अपना पक्ष रखेगी।
उनके अनुसार, पार्टी किसी भी स्थिति में दल-बदल को स्वीकार नहीं करेगी और सभी संवैधानिक विकल्पों का इस्तेमाल करेगी।
शिंदे गुट में शामिल होने की चर्चा
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, उद्धव ठाकरे गुट के छह सांसद जल्द ही मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो सकते हैं। हालांकि अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन हालिया घटनाक्रम ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
यदि ऐसा होता है, तो यह उद्धव ठाकरे गुट के लिए लोकसभा स्तर पर बड़ा झटका माना जाएगा।
आने वाले दिनों में बढ़ सकती है राजनीतिक हलचल
बागी सांसदों को सात दिन का समय दिए जाने के बाद अब सभी की नजर उनके जवाब और पार्टी की अगली रणनीति पर टिकी हुई है। यदि निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो उद्धव ठाकरे गुट औपचारिक रूप से अयोग्यता की प्रक्रिया शुरू कर सकता है।
महाराष्ट्र की राजनीति में पहले ही कई बड़े राजनीतिक बदलाव देखने को मिल चुके हैं। ऐसे में यह नया घटनाक्रम राज्य की सियासत को एक बार फिर नई दिशा दे सकता है।







