अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम समझौते के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है, जो भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। इसके बावजूद गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में अपेक्षित तेजी देखने को नहीं मिली। बाजार की सुस्त शुरुआत के पीछे अमेरिकी फेडरल रिजर्व का सख्त रुख प्रमुख कारण माना जा रहा है।
कारोबार की शुरुआत में सेंसेक्स मामूली गिरावट के साथ 77,136 अंक पर और निफ्टी हल्की बढ़त के साथ 24,090 अंक के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। बुधवार को दोनों प्रमुख सूचकांकों में अच्छी तेजी दर्ज की गई थी, लेकिन गुरुवार को निवेशकों का उत्साह कमजोर पड़ गया।
विशेषज्ञों के अनुसार फेडरल रिजर्व ने फिलहाल ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है, लेकिन भविष्य में दरें ऊंची रहने के संकेत दिए हैं। इसी वजह से वैश्विक निवेशकों का रुझान सतर्क बना हुआ है और इसका असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। सबसे अधिक दबाव आईटी सेक्टर के शेयरों पर देखने को मिला।
हालांकि, व्यापक बाजार में सकारात्मक माहौल बना रहा। निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स बढ़त के साथ कारोबार करते रहे। वहीं पीएसयू बैंक, मेटल और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में खरीदारी का माहौल देखने को मिला।
वैश्विक बाजारों की बात करें तो जापान और ताइवान के बाजारों में मजबूती रही, जबकि हांगकांग और दक्षिण कोरिया के बाजार दबाव में रहे। मिश्रित वैश्विक संकेतों का असर भारतीय निवेशकों की धारणा पर भी दिखाई दिया।
इस बीच अमेरिका-ईरान समझौते के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे फिसलकर करीब 78 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। इससे भारत का आयात बिल कम होने और महंगाई पर राहत मिलने की उम्मीद बढ़ी है। हालांकि डॉलर के मुकाबले रुपया 16 पैसे कमजोर होकर 94.69 के स्तर पर खुला।
प्राइमरी मार्केट में निवेशकों के लिए भी अवसर बने हुए हैं। रियासत लाइफस्टाइल और एविएंस बायोमेडिकल्स के आईपीओ आज से निवेश के लिए खुल गए हैं। वहीं एसएमई सेगमेंट के कई आईपीओ में भी निवेशकों की अच्छी रुचि देखने को मिल रही है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक संकेत, अमेरिकी फेड की नीतियां और कच्चे तेल की कीमतें भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।







