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  • 26 करोड़ रुपये का मुनाफा, आलीशान बंगला और टैक्स शून्य! ITAT के फैसले से महिला को मिली बड़ी राहत, जानिए कैसे बचा करोड़ों का टैक्स

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    आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) कोलकाता के एक अहम फैसले ने टैक्स और निवेश जगत में बड़ी चर्चा छेड़ दी है। कोलकाता की कारोबारी सरोज गोयनका ने शेयर बेचकर करीब 26.77 करोड़ रुपये का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) अर्जित किया, लेकिन उन्हें इस रकम पर कोई टैक्स नहीं देना पड़ेगा। ITAT ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए आयकर अधिनियम की धारा 54F के तहत पूरी टैक्स छूट को वैध माना।

    शेयर बेचकर कमाए 26.77 करोड़ रुपये

    मामले के अनुसार, एमामी समूह के प्रमोटर परिवार से जुड़ी सरोज गोयनका ने वर्ष 2020 में लगभग 36 लाख शेयर बेचकर करीब 33.77 करोड़ रुपये प्राप्त किए। इस सौदे में उन्हें लगभग 26.77 करोड़ रुपये का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन हुआ।

    सामान्य परिस्थितियों में इस लाभ पर करोड़ों रुपये का टैक्स बनता, लेकिन उन्होंने बिक्री से प्राप्त धनराशि को कोलकाता के क्वींस पार्क इलाके में एक आवासीय बंगले के निर्माण में निवेश कर दिया।

    तीन साल के भीतर पूरा किया निर्माण

    आयकर कानून की धारा 54F के तहत यदि कोई व्यक्ति शेयर, म्यूचुअल फंड, बॉन्ड या अन्य पूंजीगत संपत्ति बेचकर प्राप्त राशि को निर्धारित समय सीमा के भीतर भारत में नया आवासीय मकान खरीदने या बनाने में निवेश करता है, तो उसे कैपिटल गेन टैक्स में छूट मिल सकती है।

    सरोज गोयनका ने भी इसी प्रावधान का लाभ लेते हुए दावा किया कि उन्होंने तीन वर्ष की निर्धारित अवधि के भीतर मकान का निर्माण पूरा कर लिया, इसलिए उन्हें पूरी टैक्स छूट मिलनी चाहिए।

    आयकर विभाग ने खारिज किया दावा

    हालांकि, आयकर विभाग के असेसिंग ऑफिसर (AO) ने इस दावे को स्वीकार नहीं किया।

    विभाग ने तीन प्रमुख आपत्तियां उठाईं—

    • सरोज गोयनका के पास पहले से दो आवासीय संपत्तियां थीं।
    • बंगले का निर्माण शेयर बेचने से पहले ही शुरू हो चुका था।
    • शेयर बिक्री से मिली राशि सीधे निर्माण में उपयोग नहीं की गई।

    इन आधारों पर विभाग ने लगभग 3 करोड़ रुपये का टैक्स नोटिस जारी कर दिया।

    ITAT ने दिया बड़ा फैसला

    मामला ITAT कोलकाता पहुंचा, जहां ट्रिब्यूनल की ‘डी’ बेंच ने सरोज गोयनका के पक्ष में फैसला सुनाया।

    ट्रिब्यूनल ने कहा कि—

    • जिन संपत्तियों का हवाला आयकर विभाग दे रहा था, उनमें कुछ संयुक्त स्वामित्व वाली थीं या आवासीय श्रेणी में नहीं आती थीं।
    • कानून केवल यह कहता है कि निर्माण तीन वर्ष के भीतर पूरा होना चाहिए, निर्माण कब शुरू हुआ, इसकी कोई शर्त नहीं है।
    • कानून में यह भी कहीं अनिवार्य नहीं है कि शेयर बिक्री से प्राप्त वही राशि सीधे निर्माण में खर्च की जाए।

    इन तथ्यों के आधार पर ITAT ने आयकर विभाग का निर्णय रद्द करते हुए सरोज गोयनका को Section 54F के तहत पूरी टैक्स छूट देने का आदेश दिया।

    क्या है Section 54F?

    आयकर अधिनियम की धारा 54F के अनुसार यदि कोई व्यक्ति आवासीय मकान के अलावा किसी अन्य पूंजीगत संपत्ति—जैसे शेयर, म्यूचुअल फंड, सोना या बॉन्ड—को बेचकर प्राप्त राशि को भारत में नया आवासीय मकान खरीदने या निर्माण कराने में निवेश करता है, तो वह लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स से छूट प्राप्त कर सकता है।

    हालांकि इसके लिए निर्धारित शर्तों का पालन करना अनिवार्य है।

    अब लागू है 10 करोड़ रुपये की सीमा

    गौरतलब है कि वित्त अधिनियम 2023 के बाद Section 54F के तहत मिलने वाली अधिकतम टैक्स छूट 10 करोड़ रुपये तक सीमित कर दी गई है। यह सीमा केंद्रीय बजट 2023 से लागू हुई थी।

    चूंकि सरोज गोयनका का मामला वर्ष 2020 के लेन-देन से जुड़ा था, इसलिए उस समय यह सीमा लागू नहीं थी और उन्हें पूरी छूट का लाभ मिला।

    निवेशकों के लिए अहम संदेश

    ITAT का यह फैसला बताता है कि आयकर कानून में उपलब्ध वैध प्रावधानों का सही तरीके से पालन करने पर बड़ी टैक्स बचत संभव है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि Section 54F का लाभ केवल निर्धारित शर्तों को पूरा करने पर ही मिलता है और प्रत्येक मामले के तथ्य अलग हो सकते हैं। इसलिए ऐसे किसी भी निवेश या टैक्स प्लानिंग से पहले योग्य टैक्स सलाहकार की सलाह लेना आवश्यक है।

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