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  • दो साल बाद छलका अलका याज्ञनिक का दर्द: पद्म भूषण सम्मान के बाद बताई बीमारी से जंग की कहानी

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    देश की प्रसिद्ध पार्श्व गायिका अलका याज्ञनिक को पद्म भूषण से सम्मानित किए जाने का अवसर केवल उनके संगीत सफर का ही नहीं, बल्कि उनके जीवन के सबसे भावुक क्षणों में से एक बन गया। राष्ट्रपति भवन में आयोजित सम्मान समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों यह प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त करने के बाद अलका याज्ञनिक ने सोशल मीडिया पर एक भावुक संदेश साझा करते हुए पिछले दो वर्षों से चल रही अपनी स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर खुलकर बात की।

    उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों से वह सार्वजनिक कार्यक्रमों, मीडिया और मंच से लगभग पूरी तरह दूर रहीं। इस दौरान वह एक दुर्लभ श्रवण (हियरिंग) संबंधी बीमारी से जूझ रही थीं, जिसने उनके व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन को गहराई से प्रभावित किया।

    दो वर्षों तक रहीं लाइमलाइट से दूर

    अलका याज्ञनिक ने अपने संदेश में लिखा कि बीते दो साल उनके लिए बेहद कठिन रहे। उन्होंने कहा कि इस दौरान उन्होंने जानबूझकर खुद को सार्वजनिक जीवन से दूर रखा, क्योंकि वह अपनी सेहत पर ध्यान देना चाहती थीं।

    उन्होंने कहा कि उनके प्रशंसकों को यह जरूर पता था कि वह स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रही हैं, लेकिन उन्होंने अपनी निजी यात्रा को सार्वजनिक नहीं किया। इस कठिन दौर में उन्हें देश-दुनिया से मिलने वाले प्यार, दुआओं और शुभकामनाओं ने लगातार आगे बढ़ने की ताकत दी।

    उनके अनुसार, हर संदेश और हर प्रार्थना उनके लिए किसी दवा से कम नहीं थी।

    पद्म भूषण बना भावनात्मक पल

    अलका याज्ञनिक ने कहा कि पद्म भूषण प्राप्त करना उनके लिए केवल एक राष्ट्रीय सम्मान नहीं, बल्कि भावनात्मक रूप से बेहद खास अनुभव है। उन्होंने लिखा कि यह सम्मान भले ही उनके नाम पर हो, लेकिन वास्तव में यह उन करोड़ों श्रोताओं का भी है जिन्होंने दशकों तक उनके गीतों को अपना प्यार दिया।

    उन्होंने कहा कि उनकी आवाज को पीढ़ियों तक सुनने वाले श्रोताओं ने ही उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है। यही कारण है कि यह सम्मान उनके लिए व्यक्तिगत उपलब्धि के साथ-साथ प्रशंसकों के प्रेम का भी प्रतीक है।

    बीमारी के बावजूद नहीं टूटा हौसला

    अलका ने अपने संदेश में स्वीकार किया कि स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों ने उन्हें मानसिक रूप से भी काफी प्रभावित किया, लेकिन उन्होंने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी।

    उन्होंने कहा कि वह धीरे-धीरे सामान्य जीवन की ओर लौट रही हैं और इसी विश्वास के साथ उन्होंने पद्म भूषण सम्मान समारोह में शामिल होने का निर्णय लिया।

    उनके अनुसार यह समारोह उनके लिए केवल पुरस्कार ग्रहण करने का अवसर नहीं था, बल्कि उन लाखों लोगों का आभार व्यक्त करने का भी माध्यम था जिन्होंने कठिन समय में उनका साथ दिया।

    सरकार और देश के प्रति जताया आभार

    अलका याज्ञनिक ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्रालय और भारत सरकार का विशेष रूप से धन्यवाद व्यक्त किया।

    उन्होंने कहा कि देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल पद्म भूषण से सम्मानित किया जाना उनके लिए गर्व, विनम्रता और जिम्मेदारी—तीनों का एहसास कराता है।

    उन्होंने कहा कि यह सम्मान उन्हें आगे भी संगीत और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा से निभाने की प्रेरणा देता रहेगा।

    प्रशंसकों को दिया भावुक संदेश

    अपने संदेश के अंत में अलका याज्ञनिक ने एक बार फिर अपने प्रशंसकों का धन्यवाद किया।

    उन्होंने कहा कि वर्षों से मिला प्यार, सम्मान और विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी ताकत रहा है। उन्होंने लिखा कि पद्म भूषण स्वीकार करते समय उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे करोड़ों लोगों का स्नेह उनके साथ खड़ा हो।

    उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार केवल उनके हाथों में नहीं, बल्कि उन सभी लोगों की भावनाओं का सम्मान है जिन्होंने उनके संगीत को अपने जीवन का हिस्सा बनाया।

    2024 में किया था बीमारी का खुलासा

    अलका याज्ञनिक ने पहली बार जून 2024 में अपनी दुर्लभ श्रवण बीमारी की जानकारी सार्वजनिक की थी। उन्होंने बताया था कि एक विमान यात्रा के बाद अचानक उनकी सुनने की क्षमता गंभीर रूप से प्रभावित हो गई थी।

    इस घटना के बाद उन्होंने संगीत जगत के कलाकारों और अपने प्रशंसकों से तेज आवाज वाले संगीत से सावधानी बरतने की अपील भी की थी। उस समय उनकी इस जानकारी ने पूरे संगीत उद्योग और उनके चाहने वालों को भावुक कर दिया था।

    भारतीय संगीत की अमूल्य आवाज

    अलका याज्ञनिक पिछले चार दशकों से भारतीय फिल्म संगीत की सबसे लोकप्रिय और सफल गायिकाओं में शामिल रही हैं। उन्होंने हिंदी सहित कई भारतीय भाषाओं में हजारों गीत गाए हैं और अनेक राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त किए हैं।

    उनके नाम बॉलीवुड में सर्वाधिक महिला सोलो गीत गाने का रिकॉर्ड भी दर्ज है। उनकी मधुर आवाज ने कई पीढ़ियों को रोमांस, भावनाओं और संगीत से जोड़ा है।

    पद्म भूषण सम्मान के साथ उनका यह भावुक संदेश केवल एक कलाकार की व्यक्तिगत कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष, धैर्य और सकारात्मक सोच की प्रेरणादायक मिसाल बनकर सामने आया है। दो वर्षों की कठिन स्वास्थ्य यात्रा के बाद अलका याज्ञनिक की यह वापसी उनके प्रशंसकों के लिए किसी नई उम्मीद से कम नहीं मानी जा रही है।

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