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  • भरत तिवारी एनकाउंटर पर बवाल तेज: SDPO-थानेदार समेत पुलिस अधिकारियों पर हत्या की FIR, ‘मैसेज’ से बदली कार्रवाई पर उठे सवाल

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    बिहार के भोजपुर जिले में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। अब इस मामले में नया मोड़ तब आया है जब भरत तिवारी की मां की शिकायत पर जगदीशपुर के SDPO राजेश कुमार शर्मा, तत्कालीन शहर थानाध्यक्ष राजेश मालाकार (वर्तमान में निलंबित) सहित अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है।

    एनकाउंटर के आठ दिन बाद भी सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि यदि भरत तिवारी ने कथित तौर पर आत्मसमर्पण कर दिया था, तो आखिर कुछ ही मिनटों बाद पुलिस फायरिंग क्यों हुई? इसी बीच एक कथित “मैसेज” की चर्चा ने पूरे मामले को और रहस्यमयी बना दिया है।

    परिजनों ने लगाए आत्मसमर्पण के बाद हत्या के आरोप

    शाहपुर थाना कांड संख्या 178/26 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1)(5) और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस केस की जांच इंस्पेक्टर संजीव कुमार को सौंपी गई है।

    प्राथमिकी में भरत तिवारी की मां आशा देवी ने आरोप लगाया है कि उनके बेटे ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। उन्होंने दावा किया कि भरत लगातार वरिष्ठ अधिकारियों से बात करने की मांग कर रहा था और SDPO ने उसकी बात सुनने तथा उसकी मांगों पर विचार करने का भरोसा दिया था।

    परिजनों के अनुसार, इसी भरोसे के बाद भरत ने अपना हथियार पुलिस के सामने फेंक दिया और सरेंडर कर दिया।

    बातचीत के बाद अचानक बदले हालात

    स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक आत्मसमर्पण के बाद SDPO राजेश कुमार शर्मा और भरत तिवारी के बीच कुछ देर तक शांतिपूर्ण बातचीत भी हुई। लेकिन कुछ ही देर बाद अचानक माहौल बदल गया और फायरिंग हो गई।

    यही घटनाक्रम अब पूरे मामले का सबसे अहम और विवादित हिस्सा बन गया है।

    रहस्यमयी ‘मैसेज’ पर उठे सवाल

    इस मामले में सबसे अधिक चर्चा एक कथित मैसेज की हो रही है। परिवार और स्थानीय लोगों का दावा है कि भरत तिवारी के आत्मसमर्पण के बाद किसी व्यक्ति का एक संदेश आया था, जिसके बाद पूरे ऑपरेशन की दिशा बदल गई।

    आरोप लगाया जा रहा है कि इसी मैसेज के बाद एनकाउंटर की कार्रवाई की गई। वहीं यह भी दावा किया जा रहा है कि निलंबित किए गए पांच पुलिसकर्मी केवल वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का पालन कर रहे थे।

    हालांकि, इस कथित मैसेज की अब तक किसी सरकारी एजेंसी या पुलिस ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। फिलहाल यह केवल आरोपों और चर्चाओं तक सीमित है, लेकिन जांच में यह महत्वपूर्ण बिंदु बन गया है।

    पुलिस और परिवार के दावों में बड़ा अंतर

    भोजपुर पुलिस का कहना है कि भरत तिवारी ने पुलिस टीम पर हमला किया था और आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की गई। पुलिस के अनुसार, उसे केवल पैर में गोली लगी थी।

    वहीं परिजनों का आरोप बिल्कुल अलग है। उनका कहना है कि भरत को जमीन पर गिराकर बेहद करीब से पांच गोलियां मारी गईं। परिवार का दावा है कि गोली उसके शरीर के ऊपरी हिस्से और अंडकोष तक में लगी थी।

    यही वजह है कि पुलिस के आधिकारिक बयान और पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।

    पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर भी विवाद

    ग्रामीणों का दावा है कि घटनास्थल पर तीन गोलियां चलाई गई थीं, जबकि पोस्टमार्टम में पांच गोलियां मिलने की बात सामने आई है।

    परिजनों का आरोप है कि दो गोलियां बाद में मारी गई होंगी। हालांकि, इस दावे की अभी तक किसी जांच एजेंसी ने पुष्टि नहीं की है।

    वीडियो रिकॉर्डिंग हटवाने का आरोप

    स्थानीय लोगों का कहना है कि जब भरत तिवारी और पुलिस अधिकारियों के बीच बातचीत चल रही थी, तब कई ग्रामीण अपने मोबाइल फोन से वीडियो बना रहे थे।

    आरोप है कि पुलिस ने उन्हें वहां से हटा दिया। इसके बावजूद कुछ लोगों का दावा है कि उन्होंने दूर से पूरी घटना देखी है। यदि जांच के दौरान किसी वीडियो फुटेज का अस्तित्व सामने आता है तो वह इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकता है।

    परिवार बोला- मानसिक तनाव में था भरत

    परिजनों के अनुसार भरत तिवारी लंबे समय से जव्ह्निया गांव के बाढ़ विस्थापितों की समस्याओं को उठा रहा था। वह सोशल मीडिया और फेसबुक लाइव के माध्यम से लगातार स्थानीय मुद्दे सरकार तक पहुंचाने की कोशिश करता था।

    मां आशा देवी का कहना है कि उनका बेटा मानसिक तनाव में जरूर था, लेकिन उसकी मंशा केवल अपनी बात शासन-प्रशासन तक पहुंचाने की थी।

    सरकार ने SDPO को किया लाइन हाजिर

    मामले की गंभीरता को देखते हुए बिहार सरकार ने कार्रवाई करते हुए SDPO राजेश कुमार शर्मा को लाइन हाजिर कर पुलिस मुख्यालय में योगदान देने का आदेश जारी कर दिया है।

    उधर, इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग लगातार तेज होती जा रही है।

    गांव में बढ़ा जनआक्रोश

    भरत तिवारी की मौत के बाद बिलौटी गांव में लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। गांव में महापंचायत आयोजित की गई है। भोजपुरी अभिनेता खेसारी लाल यादव पीड़ित परिवार से मुलाकात कर चुके हैं, जबकि अभिनेता पवन सिंह की पत्नी ज्योति सिंह ने भी गांव पहुंचकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।

    परिजनों का दावा है कि भरत तिवारी ने अपनी मौत से पहले कहा था, “मेरे मरने के बाद बिहार में क्रांति आएगी।”

    अब हत्या की FIR दर्ज होने, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर आरोप लगने और कथित रहस्यमयी मैसेज की चर्चा के बाद यह मामला केवल एक पुलिस एनकाउंटर नहीं, बल्कि पूरे बिहार की कानून-व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई पर बड़ा सवाल बनकर सामने आ गया है।

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