महाराष्ट्र की राजनीति में महा विकास आघाड़ी (MVA) के भीतर बढ़ती असहजता एक बार फिर खुलकर सामने आई है। मानसून सत्र की रणनीति तय करने के लिए आयोजित गठबंधन की बैठक में 60 में से 23 विधायक अनुपस्थित रहे, जिसके बाद शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने गठबंधन की एकजुटता पर सार्वजनिक रूप से सवाल खड़े कर दिए।
बैठक में उद्धव ठाकरे ने भावुक अंदाज में कहा, “हम कहते हैं कि हम साथ हैं, लेकिन क्या हम सच में साथ हैं?” उनके इस बयान को मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों के बीच बड़ा संदेश माना जा रहा है।
छह सांसदों की बगावत के बाद बढ़ी चिंता
यह बैठक ऐसे समय हुई जब कुछ दिन पहले ही उद्धव ठाकरे गुट के छह सांसद शिवसेना के प्रतिद्वंद्वी गुट, जिसका नेतृत्व महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे कर रहे हैं, में शामिल हो गए थे। इस घटनाक्रम ने ठाकरे गुट को बड़ा राजनीतिक झटका दिया है।
चार वर्षों में यह दूसरी बड़ी बगावत मानी जा रही है। इससे पहले 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में बड़ी संख्या में विधायकों के अलग होने से शिवसेना दो हिस्सों में बंट गई थी।
बैठक से कई बड़े नेता रहे दूर
रणनीति बैठक में कई वरिष्ठ नेताओं की अनुपस्थिति ने राजनीतिक अटकलों को और हवा दे दी।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के प्रमुख शरद पवार और वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल व्यक्तिगत कारणों से बैठक में शामिल नहीं हो सके। वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नाना पटोले और विजय वडेट्टीवार भी बैठक में मौजूद नहीं थे। विजय वडेट्टीवार के कार्यालय की ओर से उनकी तबीयत खराब होने की जानकारी दी गई।
हालांकि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल और शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत बैठक में शामिल रहे।
उद्धव ठाकरे का भावुक संदेश
बैठक में सांसदों की बगावत का मुद्दा औपचारिक रूप से चर्चा का विषय नहीं बना, लेकिन उद्धव ठाकरे ने अपने नेताओं से कहा कि जो लोग साथ हैं, उन्हीं पर ध्यान केंद्रित किया जाए।
उन्होंने कहा, “जो लोग चले गए, उन्हें जाने दीजिए। अब हमें उन लोगों के साथ मजबूती से खड़ा होना होगा जो अभी भी हमारे साथ हैं।”
इसके साथ ही उन्होंने गठबंधन के सभी दलों से संयुक्त बैठकें और साझा रैलियां आयोजित कर जनता के बीच एकजुटता का संदेश देने का आग्रह किया।
मानसून सत्र की रणनीति पर चर्चा
बैठक का मुख्य उद्देश्य महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान विपक्ष की रणनीति तैयार करना था। विभिन्न जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरने की योजना बनाई गई।
हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बैठक में नेताओं की कम उपस्थिति ने गठबंधन की आंतरिक स्थिति को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
2019 में बनी थी महा विकास आघाड़ी
महा विकास आघाड़ी का गठन नवंबर 2019 में शिवसेना, कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने मिलकर किया था। उस समय विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर भाजपा और शिवसेना के बीच सहमति नहीं बनने के बाद उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस और एनसीपी के साथ सरकार बनाई थी।
हालांकि गठबंधन बनने के समय से ही इसके वैचारिक मतभेदों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। 2022 में शिवसेना में विभाजन और 2023 में एनसीपी में टूट के बाद गठबंधन लगातार राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है।
राजनीतिक भविष्य पर बढ़ी चर्चाएं
हालिया घटनाक्रम के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या महा विकास आघाड़ी आने वाले समय में अपनी एकजुटता बनाए रख पाएगी।
फिलहाल उद्धव ठाकरे ने गठबंधन के नेताओं से मतभेद भुलाकर साथ मिलकर विपक्ष की भूमिका निभाने की अपील की है। वहीं राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी महीनों में MVA की एकजुटता और संगठनात्मक मजबूती की असली परीक्षा होने वाली है।








