• Create News
  • ▶ Play Radio
  • NCERT की कक्षा 9 की नई किताब में पहली बार शामिल हुआ आपातकाल का अध्याय, भारतीय लोकतंत्र के सबसे बड़े संकटों में किया गया शामिल

    इस खबर को सुनने के लिये प्ले बटन को दबाएं।

    राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने पहली बार कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की नई पाठ्यपुस्तक में वर्ष 1975 से 1977 के बीच लागू आपातकाल (Emergency) पर विस्तृत अध्याय शामिल किया है। नई पुस्तक में आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के सामने आए सबसे बड़े संकटों में से एक बताया गया है।

    Understanding Society: India and Beyond‘ नामक नई सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में लोकतंत्र की चुनौतियों पर आधारित अध्याय के तहत आपातकाल का उल्लेख किया गया है। NCERT के अधिकारियों के अनुसार, यह पहला अवसर है जब कक्षा 9 के पाठ्यक्रम में इस विषय को विस्तार से शामिल किया गया है।

    लोकतंत्र पर सबसे बड़ी चुनौती के रूप में आपातकाल का उल्लेख

    पुस्तक में कहा गया है कि 1975 से 1977 के दौरान लगाया गया राष्ट्रीय आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के लिए एक बड़ी चुनौती था। इसमें बताया गया है कि उस समय बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और सरकार के खिलाफ जन असंतोष के बीच देश में व्यापक विरोध प्रदर्शन हो रहे थे।

    पुस्तक के अनुसार, जून 1975 में “आंतरिक अशांति” के आधार पर राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया गया, जिसके दौरान अधिकांश मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए, प्रेस पर सेंसरशिप लागू हुई और अनेक राजनीतिक नेताओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया।

    नई पुस्तक में उल्लेख किया गया है कि इस अवधि में लोकतांत्रिक संस्थाओं पर गंभीर दबाव पड़ा और नागरिकों की स्वतंत्रता काफी हद तक सीमित हो गई।

    जयप्रकाश नारायण आंदोलन को भी मिली जगह

    पाठ्यपुस्तक में लोकनायक जयप्रकाश नारायण की भूमिका का भी विस्तार से उल्लेख किया गया है। इसमें बताया गया है कि जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में छात्रों और आम नागरिकों ने विशेष रूप से बिहार और गुजरात में व्यापक जन आंदोलन चलाया।

    पुस्तक में कहा गया है कि 1977 में आपातकाल समाप्त होने के बाद हुए आम चुनावों में जनता ने मतदान के माध्यम से अपनी राय व्यक्त की और तत्कालीन सरकार की हार ने भारतीय लोकतंत्र की मजबूती को साबित किया।

    लोकतंत्र की अन्य चुनौतियों का भी उल्लेख

    नई सामाजिक विज्ञान पुस्तक में आपातकाल के साथ-साथ लोकतंत्र के सामने मौजूद अन्य चुनौतियों पर भी चर्चा की गई है।

    इनमें फेक न्यूज, भ्रामक सूचना, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, नियमों का उल्लंघन, गरीबी, क्षेत्रवाद, सामाजिक भेदभाव और लैंगिक असमानता जैसे विषयों को भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चुनौती बताया गया है।

    पहली बार जोड़ा गया “Democracy and You” खंड

    NCERT ने इस पुस्तक में पहली बार “Democracy and You” शीर्षक से एक नया अनुभाग भी जोड़ा है। इसका उद्देश्य छात्रों को लोकतंत्र में नागरिकों की भूमिका और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में उनकी भागीदारी को बेहतर ढंग से समझाना है।

    इस खंड के माध्यम से विद्यार्थियों को यह बताया गया है कि लोकतंत्र केवल चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी और जिम्मेदारी भी इसकी सफलता के लिए आवश्यक है।

    भारतीय लोकतांत्रिक परंपराओं पर विशेष जोर

    नई पुस्तक में भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं को प्राचीन काल से जोड़ते हुए वर्तमान शासन व्यवस्था तक उसकी निरंतरता को भी समझाया गया है।

    पुस्तक में मीडिया को लोकतंत्र का “चौथा स्तंभ” बताते हुए उसकी भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की गई है। इसमें बताया गया है कि मीडिया जनता की आवाज को सामने लाने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

    लोकतंत्र के आंकड़ों और उदाहरणों को भी किया गया शामिल

    पुस्तक में भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को समझाने के लिए कई तथ्य और आंकड़े भी दिए गए हैं। इसमें बताया गया है कि वर्ष 2024 में देश में 96.8 करोड़ से अधिक पंजीकृत मतदाता थे और देशभर में विशाल मतदान केंद्रों का नेटवर्क लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती का प्रतीक है।

    इसके अलावा गुजरात के एक पंचायत मॉडल और त्रिपुरा की महिला-अनुकूल पंचायत जैसे उदाहरणों के माध्यम से जमीनी स्तर पर लोकतंत्र और नागरिक भागीदारी को समझाने का प्रयास किया गया है। स्थानीय निकायों में महिलाओं के आरक्षण और मतदान अधिकारों पर भी अलग से चर्चा की गई है।

    NCERT की इस नई पहल को शिक्षा जगत में महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि इसके माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास, उसकी चुनौतियों और लोकतांत्रिक मूल्यों के महत्व से प्रारंभिक स्तर पर परिचित कराया जाएगा।

  • Related Posts

    किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी; कर्जमाफी की पहली किस्त जारी, 6.22 लाख किसानों के खातों में 5,029 करोड़ रुपये जमा

    इस खबर को सुनने के लिये प्ले बटन को दबाएं। महाराष्ट्र के किसानों के लिए बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार की ओर से अहिल्यादेवी होलकर…

    Continue reading
    माऊली शेती औजारे: आधुनिक कृषि उपकरणों के साथ किसानों की प्रगति का संकल्प, सोमनाथ सोनवणे की प्रेरणादायक पहल

    इस खबर को सुनने के लिये प्ले बटन को दबाएं। कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक और बेहतर उपकरणों की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए माऊली शेती औजारे किसानों के लिए…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *