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  • भीमराव कांबले को फांसी की सजा कैसे मिली? जज ने छुट्टियां तक रद्द कर दीं, सीएम फडणवीस ने बताई पूरी पर्दे के पीछे की कहानी

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    पुणे जिले के भोर तहसील स्थित नरसापुर में तीन साल की मासूम बच्ची से दुष्कर्म और उसकी निर्मम हत्या करने वाले आरोपी भीमराव कांबले को अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है। इस फैसले के बाद पूरे महाराष्ट्र में संतोष व्यक्त किया जा रहा है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में इस मामले की जांच और त्वरित न्यायिक प्रक्रिया की सराहना करते हुए बताया कि किस तरह पुलिस और अदालत के समन्वय से महज 55 दिनों में आरोपी को फांसी की सजा दिलाई गई।

    55 दिनों में पूरा हुआ मुकदमा

    मुख्यमंत्री फडणवीस ने बताया कि घटना के बाद पुलिस ने बेहद तेज़ी से कार्रवाई करते हुए 16 मई 2026 को, यानी केवल 14 दिनों के भीतर, अदालत में आरोपपत्र (चार्जशीट) दाखिल कर दिया।

    इसके बाद 28 मई 2026 को आरोपी पर आरोप तय किए गए और 26 मई 2026 से गवाहों की गवाही दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू हुई। अगले 16 दिनों में 55 गवाहों के बयान और जिरह पूरी कर ली गई।

    इसके बाद 25 जून 2026 को अदालत ने भीमराव कांबले को दोषी करार दिया और 29 जून 2026 को उसे फांसी की सजा सुनाई।

    जज ने छुट्टियां भी कर दीं रद्द

    मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से न्यायाधीश एस. आर. सालुंखे का आभार व्यक्त किया।

    उन्होंने कहा कि चार्जशीट दाखिल होने तक मामला पुलिस के पास रहता है, लेकिन उसके बाद पूरी जिम्मेदारी अदालत की होती है। इस मामले में लगातार सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए न्यायाधीश सालुंखे ने अपनी सभी छुट्टियां तक रद्द कर दीं, ताकि मुकदमे में किसी तरह की देरी न हो।

    फडणवीस ने कहा कि महज 29 दिनों में 55 गवाहों की गवाही पूरी कर फैसला सुनाना न्याय व्यवस्था का एक अनुकरणीय उदाहरण है।

    समय पर न्याय मिलना जरूरी

    मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे जघन्य अपराधों में केवल कठोर सजा ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि समय पर न्याय मिलना भी उतना ही जरूरी है

    उन्होंने कहा कि इस फैसले से समाज में कानून के प्रति विश्वास मजबूत होगा और ऐसे अपराध करने वालों में कानून का भय पैदा होगा।

    पुलिस जांच की भी सराहना

    देवेंद्र फडणवीस ने पुणे ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह गिल और उनकी पूरी टीम की भी प्रशंसा की।

    उन्होंने कहा कि पुलिस ने बेहद पेशेवर तरीके से साक्ष्य जुटाए और अदालत में मजबूत सबूत पेश किए। यही वजह रही कि सभी महत्वपूर्ण साक्ष्यों को अदालत ने स्वीकार किया और आरोपी के खिलाफ अपराध पूरी तरह साबित हो गया।

    न्यायपालिका और पुलिस को दिया श्रेय

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले में पुलिस की तेज़ जांच, सरकारी पक्ष की प्रभावी पैरवी और अदालत की लगातार सुनवाई ने मिलकर यह संभव किया कि एक बेहद संवेदनशील मामले में रिकॉर्ड समय में फैसला सुनाया जा सके।

    उन्होंने कहा कि यह मामला भविष्य के लिए एक मिसाल है कि यदि जांच एजेंसियां और न्यायपालिका पूरी गंभीरता से काम करें, तो पीड़ित परिवारों को वर्षों तक न्याय का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

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