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  • भारत-जापान साझेदारी को नई रफ्तार: 2029 तक पटरी पर दौड़ेगी बुलेट ट्रेन, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने दिया भरोसा

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    भारत और जापान के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी लगातार मजबूत होती जा रही है। जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची की भारत यात्रा के बीच आयोजित ‘इंडो-जापान स्ट्रैटेजिक डायलॉग’ में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने दोनों देशों के संबंधों को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें कहीं। उन्होंने भरोसा जताया कि लंबे समय से चर्चा में रही मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना अब पूरी तरह पटरी पर लौट चुकी है और वर्ष 2029 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

    एनडीटीवी के एडिटर-इन-चीफ राहुल कंवल के साथ बातचीत में पीयूष गोयल ने कहा कि भारत जापान को केवल एक व्यापारिक साझेदार के रूप में नहीं, बल्कि विकास यात्रा के महत्वपूर्ण सहयोगी के रूप में देखता है। आने वाले वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग को और मजबूत किया जाएगा।

    भारत के विकास में जापान की बड़ी भूमिका

    पीयूष गोयल ने कहा कि जापान ने भारत के औद्योगिक विकास में ऐतिहासिक योगदान दिया है। उन्होंने विशेष रूप से मारुति सुजुकी का उल्लेख करते हुए कहा कि लगभग चार दशक पहले कंपनी ने भारत में आधुनिक, किफायती और तकनीक आधारित ऑटोमोबाइल उद्योग की नींव रखी।

    उन्होंने बताया कि मई 2026 में भारत में बिकने वाली लगभग 4 लाख पैसेंजर गाड़ियों में से 1.47 लाख वाहन मारुति सुजुकी के थे। इससे स्पष्ट होता है कि जापानी कंपनियों ने भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में अहम भूमिका निभाई है।

    व्यापार और निवेश दोनों क्षेत्रों में मजबूत साझेदारी

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत और जापान के बीच संबंध केवल निवेश तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों और आधुनिक तकनीक पर आधारित व्यापार लगातार बढ़ रहा है।

    उन्होंने कहा कि भारत जापान को केवल कच्चा माल नहीं, बल्कि उच्च गुणवत्ता वाले ऑटोमोबाइल पार्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और प्रिसीजन इंजीनियरिंग उत्पाद निर्यात कर रहा है। वहीं जापान से भारत आधुनिक तकनीक और उन्नत औद्योगिक उत्पाद आयात करता है।

    गोयल ने कहा कि दोनों देशों के बीच यह संबंध आने वाले समय में और अधिक व्यापक होने वाला है।

    बुलेट ट्रेन परियोजना फिर हुई रफ्तार पर

    मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर भारत और जापान के बीच सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक है। लगभग 508 किलोमीटर लंबी इस परियोजना में जापान की प्रसिद्ध शिंकान्सेन तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।

    इस परियोजना के पूरा होने के बाद ट्रेनें 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी, जिससे मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा का समय छह घंटे से घटकर लगभग दो घंटे रह जाएगा।

    देरी के लिए पिछली महाराष्ट्र सरकार को ठहराया जिम्मेदार

    परियोजना में हुई देरी पर बोलते हुए पीयूष गोयल ने महाराष्ट्र की पूर्व महाविकास अघाड़ी सरकार पर निशाना साधा।

    उन्होंने कहा कि गुजरात में अधिकांश भूमि अधिग्रहण समय पर पूरा हो गया था, लेकिन महाराष्ट्र में राजनीतिक कारणों से आवश्यक भूमि उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके कारण परियोजना की गति प्रभावित हुई और काफी समय नष्ट हुआ।

    गोयल ने कहा कि वर्तमान सरकार के कार्यभार संभालने के बाद अब सभी जरूरी प्रक्रियाएं तेजी से पूरी की जा रही हैं और परियोजना निर्धारित समय सीमा के अनुसार आगे बढ़ रही है।

    2029 तक पूरा होने की उम्मीद

    केंद्रीय मंत्री ने विश्वास जताया कि अब परियोजना को लेकर किसी प्रकार की बड़ी बाधा नहीं है। स्टेशन निर्माण के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध करा दी गई है और निर्माण कार्य तेज गति से आगे बढ़ रहा है।

    उन्होंने कहा कि यदि वर्तमान गति बनी रहती है तो वर्ष 2029 तक बुलेट ट्रेन परियोजना पूरी होने की पूरी संभावना है।

    जापान में भारतीय पेशेवरों के लिए नए अवसर

    पीयूष गोयल ने भारतीय युवाओं के लिए जापान में बढ़ते रोजगार अवसरों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जापान की तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी के कारण वहां प्रशिक्षित केयरगिवर्स और हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स की भारी मांग है।

    हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जापान में रोजगार पाने के लिए केवल तकनीकी योग्यता पर्याप्त नहीं है, बल्कि जापानी भाषा और वहां की संस्कृति की समझ भी बेहद जरूरी है।

    गोयल ने कहा कि यदि भारतीय युवा जापानी भाषा सीखते हैं और स्थानीय संस्कृति को समझते हैं, तो उनके लिए जापान में रोजगार के अनेक नए अवसर खुल सकते हैं।

    भारत-जापान संबंधों का नया अध्याय

    विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में भारत और जापान की साझेदारी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारियों में से एक बन चुकी है।

    बुलेट ट्रेन परियोजना, औद्योगिक निवेश, आधुनिक तकनीक, सेमीकंडक्टर, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है।

    जापान की प्रधानमंत्री की इस यात्रा और भारत-जापान शिखर सम्मेलन से दोनों देशों के बीच आर्थिक, रणनीतिक और तकनीकी सहयोग को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    पीयूष गोयल के अनुसार आने वाले वर्षों में भारत और जापान का संबंध केवल निवेश और व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि नवाचार, इंफ्रास्ट्रक्चर और मानव संसाधन विकास के क्षेत्र में भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा।

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