लगातार महंगे पेट्रोल और डीजल से परेशान आम लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आ रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ चुकी हैं, जिसके बाद भारत में भी पेट्रोल और डीजल के दाम घटने की उम्मीद तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौजूदा स्थिति बनी रहती है तो सरकारी तेल कंपनियां जुलाई के अंत या अगस्त की शुरुआत तक पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 2 से 4 रुपये प्रति लीटर तक की कटौती कर सकती हैं।
क्रूड ऑयल सस्ता, लेकिन अभी क्यों नहीं घटे दाम?
हालांकि निजी क्षेत्र की प्रमुख ईंधन कंपनी नयारा एनर्जी ने 1 जुलाई से पेट्रोल 5 रुपये और डीजल 3 रुपये प्रति लीटर सस्ता कर दिया है, लेकिन देश की सरकारी तेल कंपनियां—इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL)—ने अभी तक कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है।
इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि सरकारी कंपनियां अभी भी उस कच्चे तेल को रिफाइन कर रही हैं जिसे उन्होंने कुछ सप्ताह पहले अधिक कीमतों पर खरीदा था। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई गिरावट का असर खुदरा कीमतों पर तुरंत नहीं दिखाई देता।
क्यों हो रही है देरी?
विशेषज्ञों के अनुसार भारत में ईंधन की कीमत केवल कच्चे तेल पर निर्भर नहीं करती। इसमें कई अन्य लागतें भी शामिल होती हैं, जैसे—
- रिफाइनिंग की लागत
- परिवहन खर्च
- डॉलर-रुपया विनिमय दर
- केंद्र एवं राज्य सरकारों के टैक्स
- तेल कंपनियों का मार्जिन
इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट के बावजूद घरेलू बाजार में कीमतें कम होने में आमतौर पर 2 से 4 सप्ताह का समय लग जाता है।
सरकारी कंपनियों ने पहले खुद उठाया था नुकसान
मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ने के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया था। उस समय सरकारी तेल कंपनियों ने पूरी लागत ग्राहकों पर नहीं डाली थी और काफी नुकसान खुद उठाया।
जानकारों के मुताबिक मार्च से मई के बीच सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और LPG की बिक्री पर करीब 1 लाख करोड़ रुपये तक का अंडर-रिकवरी नुकसान हुआ। अब कंपनियां पहले उस नुकसान की भरपाई करना चाहती हैं।
कितनी सस्ती हो सकती है पेट्रोल-डीजल?
एनर्जी मार्केट विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्रूड ऑयल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रहती हैं या इससे नीचे जाती हैं तो—
- पेट्रोल 2 से 4 रुपये प्रति लीटर तक सस्ता हो सकता है।
- डीजल में भी लगभग इतनी ही कटौती संभव है।
हालांकि सरकार बहुत बड़ी कटौती करने के बजाय सीमित राहत देना पसंद कर सकती है ताकि तेल कंपनियों की वित्तीय स्थिति भी सुधर सके।
नयारा एनर्जी ने पहले ही घटाए दाम
नयारा एनर्जी देश की सबसे बड़ी निजी फ्यूल रिटेलर कंपनियों में शामिल है और उसके 7,000 से अधिक पेट्रोल पंप हैं।
कंपनी ने 1 जुलाई से—
- पेट्रोल 5 रुपये प्रति लीटर
- डीजल 3 रुपये प्रति लीटर
सस्ता कर दिया है। यह कटौती मार्च में बढ़ाई गई कीमतों को वापस लेने के रूप में की गई है।
LPG और ATF में भी राहत
सरकार ने व्यावसायिक उपभोक्ताओं को भी राहत दी है।
- 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत में 173 से 184 रुपये तक की कमी की गई है।
- एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) भी लगभग 5 रुपये प्रति लीटर सस्ता हुआ है।
हालांकि घरेलू 14.2 किलोग्राम वाले LPG सिलेंडर की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है।
कच्चे तेल में बड़ी गिरावट
कुछ सप्ताह पहले मध्य-पूर्व संकट के दौरान कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गई थीं। अब हालात सामान्य होने के बाद कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक बाजार में सप्लाई बढ़ने और मांग अपेक्षाकृत कमजोर रहने से आने वाले समय में भी क्रूड ऑयल की कीमतें नियंत्रित रह सकती हैं।
पेट्रोलियम मंत्री ने भी दिए संकेत
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी पहले ही संकेत दे चुके हैं कि आने वाले महीनों में ईंधन की कीमतों में राहत मिल सकती है। उनका कहना है कि तेल कंपनियां पहले महंगे कच्चे तेल के स्टॉक का उपयोग कर रही हैं और उसके बाद कीमतों में कमी का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाएगा।
क्या आम लोगों को जल्द मिलेगी राहत?
यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोई नया भू-राजनीतिक संकट नहीं आता और क्रूड ऑयल की कीमतें मौजूदा स्तर पर बनी रहती हैं, तो जुलाई के अंत या अगस्त की शुरुआत में सरकारी तेल कंपनियां भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती कर सकती हैं।
ऐसी स्थिति में वाहन चालकों के साथ-साथ परिवहन लागत कम होने से महंगाई पर भी सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है।








