अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा विवाद में ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी प्रतिक्रिया दी है। रामभक्तों के नाम लिखे एक पत्र में उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि उन्होंने फिलहाल मौन धारण किया है और विशेष जांच दल (SIT) की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद सभी सवालों का क्रमवार जवाब देंगे।
चंपत राय ने अपने पत्र में कहा कि उनके खिलाफ विभिन्न प्रकार के आरोप और चर्चाएं चल रही हैं, लेकिन वह अभी इस मामले पर विस्तृत टिप्पणी नहीं करेंगे। उन्होंने लिखा कि SIT की अंतिम रिपोर्ट आने तक उन्होंने मौन रहने का निर्णय लिया है और उसके बाद सभी तथ्यों को सार्वजनिक करेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि जो रिपोर्ट अभी चर्चा में है, उसे उन्होंने “परम गोपनीय” बताया और कहा कि वह अब सार्वजनिक हो चुकी है। उनके अनुसार, अंतिम रिपोर्ट आने के बाद प्रत्येक आरोप का तथ्यात्मक जवाब दिया जाएगा और पूरी सच्चाई सामने आ जाएगी।
चंपत राय ने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1991 से वह संगठन के कार्यकर्ता के रूप में अयोध्या में कार्य कर रहे हैं और उनका लगभग 45 वर्षों का प्रचारक जीवन पूरी तरह पारदर्शी रहा है। उन्होंने दावा किया कि उनका सार्वजनिक जीवन हमेशा खुली किताब की तरह रहा है।
इससे पहले राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार किए गए थे। बैठक में ट्रस्ट के सदस्यों ने कहा कि चढ़ावे में कथित अनियमितताओं के आरोपों से मंदिर की प्रतिष्ठा प्रभावित हुई है और पूरे मामले की सच्चाई सामने आनी चाहिए। ट्रस्ट ने मामले में SIT की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार करने का फैसला लिया है और अगली बैठक 22 जुलाई को आयोजित करने की घोषणा की है।
इस बीच, सामने आई SIT की अंतरिम रिपोर्ट में मंदिर प्रशासन और चढ़ावे के प्रबंधन से जुड़ी कई प्रक्रियात्मक कमियों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, चढ़ावे की गिनती के दौरान निर्धारित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। जांच के दौरान मिले CCTV फुटेज में कुछ कर्मचारियों को कथित तौर पर जेब और मोजों में नकदी रखते हुए देखा गया, जिसकी जांच जारी है।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष SIT की विस्तृत रिपोर्ट तथा आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।
नोट: इस मामले में लगाए गए आरोप जांच के दायरे में हैं। अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच एजेंसियों और न्यायिक प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ही सामने आएगा।








