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  • डॉक्टर पर हमले के बाद बड़ा फैसला: शिवसेना नेता की मारपीट से डरे डॉक्टर ने दिया इस्तीफा, कहा- “अब कभी वापस नहीं लौटूंगा”

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    महाराष्ट्र के ठाणे जिले में डॉक्टरों पर हुए हमले के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के नगरसेवक रमेश म्हात्रे पर कथित हमले के बाद पीड़ित डॉक्टरों में से एक ने डर के कारण नौकरी से इस्तीफा दे दिया है। डॉक्टर ने कहा कि उन्होंने शहर छोड़ दिया है और अब कभी वापस नहीं लौटेंगे।

    डॉक्टर ने मीडिया से बातचीत में कहा, “मैंने इस्तीफा इसलिए दिया क्योंकि मुझे अपनी सुरक्षा का डर है। गुंडे हमारी निगरानी कर रहे हैं। मैं शहर छोड़ चुका हूं और अब कभी वहां वापस नहीं जाऊंगा। बाकी डॉक्टर काम जारी रख सकते हैं, लेकिन मैं नहीं।”

    क्या है पूरा मामला?

    यह घटना 6 जुलाई 2026 को डोंबिवली स्थित शास्त्री नगर अस्पताल में हुई थी, जिसे कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (KDMC) संचालित करता है।

    अस्पताल प्रशासन के अनुसार, अस्पताल की नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) पूरी तरह भरी हुई थी। ऐसे में दो डॉक्टरों ने एक नवजात के परिजनों को बेहतर इलाज के लिए दूसरे अस्पताल में रेफर करने की सलाह दी।

    इसके बाद परिजनों ने नगरसेवक रमेश म्हात्रे को बुलाया। आरोप है कि वह अपने समर्थकों के साथ अस्पताल पहुंचे और डॉक्टरों तथा स्टाफ के साथ बहस के बाद मारपीट की।

    वायरल वीडियो में दिखा हमला

    घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें रमेश म्हात्रे एक महिला डॉक्टर के हाथ से मोबाइल फोन झटकते और बाद में अन्य डॉक्टरों व अस्पताल कर्मचारियों के साथ धक्का-मुक्की करते दिखाई दिए। इस हमले में एक डॉक्टर घायल भी हुआ।

    आरोपी नेता ने नहीं जताया पछतावा

    रमेश म्हात्रे ने डॉक्टरों पर हमला करने के आरोप से इनकार किया है। उनका कहना है कि उन्होंने महिला डॉक्टर पर हमला नहीं किया, बल्कि केवल उनका मोबाइल हटाया क्योंकि वह उनकी बात नहीं सुन रही थीं।

    उन्होंने यह भी कहा कि यदि डॉक्टर अपने व्यवहार के लिए माफी मांगते हैं, तो वह भी खेद व्यक्त करने पर विचार करेंगे। साथ ही उन्होंने दावा किया कि उनका उद्देश्य मरीज और नवजात की जान बचाना था।

    पुलिस की कार्रवाई

    घटना के बाद पुलिस ने रमेश म्हात्रे और उनके पांच साथियों के खिलाफ मामला दर्ज किया। पुलिस ने बुधवार को रमेश म्हात्रे को गिरफ्तार कर लिया। बाद में उनकी तबीयत बिगड़ने की शिकायत पर उन्हें ठाणे सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया।

    यह मामला डॉक्टरों की सुरक्षा और अस्पतालों में हिंसा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। डॉक्टर संगठनों ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

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