• Create News
  • ▶ Play Radio
  • भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, फिलहाल नहीं होगी परिसर में जुमे की नमाज, सुनवाई के लिए तैयार कोर्ट

    इस खबर को सुनने के लिये प्ले बटन को दबाएं।

    मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला- कमाल मौला मस्जिद विवाद मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए इसे “संवेदनशील मुद्दा” बताया। अदालत ने फिलहाल भोजशाला परिसर में शुक्रवार की नमाज बहाल करने से इनकार कर दिया, लेकिन मुस्लिम पक्ष की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई।

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले की रोजाना सुनवाई की जा सकती है ताकि लंबे समय से चले आ रहे इस विवाद का जल्द समाधान निकाला जा सके। अदालत ने दोनों पक्षों से संयम बनाए रखने की अपील भी की।

    फिलहाल परिसर में नमाज की अनुमति नहीं

    मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए कहा कि फिलहाल भोजशाला परिसर में शुक्रवार की नमाज की अनुमति नहीं दी जाएगी। हालांकि, अदालत ने मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि परिसर के समीप एक खुला स्थान उपलब्ध कराया जाए, जहां मुस्लिम समुदाय हर शुक्रवार दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक नमाज अदा कर सके।

    ASI को भी दिए निर्देश

    सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को भी निर्देश दिया कि न्यायालय की अनुमति के बिना भोजशाला परिसर में किसी प्रकार का संरचनात्मक बदलाव न किया जाए।

    क्या है पूरा मामला?

    मुस्लिम पक्ष ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें मई 2026 में भोजशाला को मंदिर घोषित किया गया था। हाईकोर्ट ने वर्ष 2003 के ASI के उस आदेश को भी रद्द कर दिया था, जिसके तहत हिंदुओं को मंगलवार और मुसलमानों को शुक्रवार को पूजा एवं नमाज की अनुमति दी गई थी।

    हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि उपलब्ध साक्ष्यों से यह संकेत मिलता है कि भोजशाला कभी संस्कृत शिक्षण केंद्र और मां सरस्वती का मंदिर था।

    दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे

    हिंदू पक्ष का दावा है कि भोजशाला राजा भोज द्वारा निर्मित मां वाग्देवी (सरस्वती) का प्राचीन मंदिर है। वहीं मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यह परिसर सदियों से कमाल मौला मस्जिद के रूप में उपयोग में रहा है और वहां नमाज का अधिकार बहाल किया जाना चाहिए।

    ASI सर्वे पर भी विवाद

    हाईकोर्ट के निर्देश पर ASI ने वर्ष 2024 में लगभग 98 दिनों तक वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया था। 2,000 से अधिक पन्नों की रिपोर्ट में ASI ने दावा किया कि वर्तमान संरचना से पहले वहां परमार शासकों के काल का एक विशाल मंदिरनुमा ढांचा मौजूद था और बाद में मंदिर के अवशेषों का उपयोग कर वर्तमान संरचना बनाई गई।

    हालांकि, मुस्लिम पक्ष ने ASI की रिपोर्ट को अदालत में पक्षपातपूर्ण बताते हुए उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं।

    फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने मामले की विस्तृत सुनवाई का संकेत दिया है। ऐसे में अब सभी की नजर आगामी सुनवाई और अंतिम निर्णय पर टिकी हुई है।

  • Related Posts

    “अपोलो फार्मेसी में टैगोर इंस्टीट्यूट के 7 विद्यार्थियों का चयन, फार्मासिस्ट पद पर बनाएंगे करियर”

    इस खबर को सुनने के लिये प्ले बटन को दबाएं। अवास कैवर्त | छत्तीसगढ़ | समाचार वाणी न्यूज़ किसी विद्यार्थी की वर्षों की मेहनत तब सार्थक होती है, जब पढ़ाई…

    Continue reading
    “मनोज जरांगे पाटील : ‘पाटील मेरी गाड़ी में बैठिए और…’ डिफेंडर गाड़ी पर लगे आरोपों पर जरांगे पाटील ने दिया स्पष्टीकरण”

    इस खबर को सुनने के लिये प्ले बटन को दबाएं। मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटील इन दिनों पश्चिम महाराष्ट्र के दौरे पर हैं। इसी दौरान उन्होंने मराठा…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *