संसद के मानसून सत्र के दौरान राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में चल रहे CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के आंदोलन और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है और यह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने मीडिया से बातचीत में कहा कि विपक्ष की मांग थी कि छात्रों से जुड़े गंभीर मुद्दों, विशेषकर NEET पेपर लीक प्रकरण और आंदोलन के दौरान हुई घटनाओं पर संसद में विस्तृत चर्चा कराई जाए। उन्होंने कहा कि चर्चा के बाद केंद्रीय गृह मंत्री को सदन में बयान देना चाहिए था तथा सभी दलों के नेताओं को अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए था, लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं होने दिया।
खड़गे ने कहा कि विपक्ष देश के सामने छात्रों की समस्याएं और आंदोलन के दौरान हुई घटनाओं को रखना चाहता था, लेकिन उन्हें अपनी बात कहने का अवसर नहीं दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार संसद में विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है, जो लोकतंत्र को कमजोर करने वाला कदम है।
उन्होंने कहा कि अपने छह दशक लंबे राजनीतिक जीवन में उन्होंने विधानसभा, लोकसभा और राज्यसभा सहित अनेक संसदीय कार्यवाहियों को देखा है, लेकिन इस प्रकार का माहौल पहले कभी नहीं देखा। उनके अनुसार संसद लोकतांत्रिक संवाद का सर्वोच्च मंच है, जहां सभी पक्षों को अपनी बात रखने का समान अवसर मिलना चाहिए।
कांग्रेस अध्यक्ष ने CJP आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आखिर छात्रों और युवाओं पर लाठीचार्ज क्यों किया गया और उन्हें अपनी बात रखने का अधिकार क्यों नहीं दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विरोध की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है।
खड़गे ने यह भी कहा कि विपक्ष को संसद परिसर में भी स्वतंत्र रूप से आने-जाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उनके अनुसार सांसदों को इस प्रकार रोकना लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि जनप्रतिनिधियों को ही अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिलेगा, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था की भावना प्रभावित होगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार देश में ऐसा माहौल बना रही है, जिससे विरोध करने वालों में भय पैदा हो। उन्होंने कहा कि छात्रों, युवाओं और विपक्षी दलों की आवाज को दबाने के बजाय सरकार को उनकी चिंताओं को सुनना चाहिए और संवेदनशील मुद्दों पर सार्थक चर्चा करनी चाहिए।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े विषयों पर राजनीति से ऊपर उठकर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि संसद में खुली चर्चा कराई जाए और लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखते हुए सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर दिया जाए।
खड़गे के इन बयानों के बाद संसद के मानसून सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। वहीं, CJP आंदोलन और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक बहस लगातार जारी है।








