कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के पूर्व प्रवक्ता विजयेता दहिया ने प्रदर्शन के दौरान बर्गर खाते हुए वायरल हुए वीडियो पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा है कि यदि किसी व्यक्ति को भूख लगती है तो वह खाना खाता है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है। उन्होंने अपने खिलाफ उठे विवाद को “प्रचार” करार देते हुए कहा कि उनका पूरा ध्यान आंदोलन और उसके उद्देश्य पर रहा है।
दिल्ली में संसद मार्च के दौरान वायरल हुए एक वीडियो में दहिया बर्गर खाते हुए दिखाई दिए थे। इसके बाद CJP ने उनके इस व्यवहार को आंदोलन की भावना के विपरीत बताते हुए उन्हें प्रवक्ता पद से हटा दिया था। पार्टी ने अपने बयान में कहा था कि उनका आचरण आंदोलन के मूल्यों और सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है।
एनडीटीवी से बातचीत में विजयेता दहिया ने कहा कि उन्होंने आंदोलन के दौरान लगातार कई घंटों तक बिना रुके काम किया। उन्होंने दावा किया कि वह प्रदर्शन के आयोजन, अतिथियों के समन्वय, मीडिया से संवाद और विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे थे। उनके अनुसार, यह पूरा विवाद केवल उनकी छवि खराब करने के उद्देश्य से फैलाया गया।
दहिया ने कहा कि यदि उन्हें पद से हटाने का फैसला आंदोलन को मजबूत बनाता है तो उन्हें इससे कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा, “यदि मेरे एक त्याग से आंदोलन मजबूत होता है, तो मुझे इसमें कोई समस्या नहीं है। व्यक्ति से बड़ा आंदोलन और उसका उद्देश्य होता है।”
बर्गर वीडियो पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा, “अगर किसी को भूख लगती है तो वह खाना खाता है। भूखे रहने को महिमामंडित करने में मैं विश्वास नहीं करता। मैं हर व्यक्ति के सम्मानपूर्वक भोजन करने के अधिकार का समर्थन करता हूं। अगर मैंने लंबे समय तक कुछ नहीं खाया था और मुझे भूख लगी थी, तो बर्गर खाना कोई गलत बात नहीं है।”
दहिया ने यह भी कहा कि प्रदर्शन के दौरान नेतृत्व की कमी के आरोप सही नहीं हैं। उनके अनुसार, उस समय पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता सरकार के प्रतिनिधियों से बातचीत करने गए हुए थे, जबकि प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने के लिए उत्सुक थे। परिस्थितियों को देखते हुए मार्च शुरू किया गया।
इस बीच CJP ने स्पष्ट किया है कि उसके दो नेताओं ने केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा से मुलाकात कर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा था। सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत को लेकर दोनों पक्षों ने अलग-अलग दावे किए हैं।
वायरल वीडियो और उसके बाद हुई कार्रवाई ने आंदोलन के भीतर नई बहस छेड़ दी है। हालांकि विजयेता दहिया का कहना है कि व्यक्तिगत विवादों से अधिक महत्वपूर्ण छात्रों और आंदोलन की मूल मांगें हैं तथा उनका समर्थन भविष्य में भी जारी रहेगा।








