मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख नेता मनोज जरांगे पाटील दिल्ली रवाना होने से पहले मीडिया से बातचीत में सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि देश के युवा और छात्र न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं तो समाज का हर वर्ग उनके साथ खड़ा होना चाहिए। उन्होंने सत्ता के अहंकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि “सत्ता का घमंड और मस्ती हमेशा नहीं रहती। एक बार जनता का विश्वास टूट जाए तो वही लोग सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाते हैं।”
मनोज जरांगे पाटील ने कहा कि उन्होंने अपने आगामी दौरे रद्द कर दिल्ली जाने का निर्णय इसलिए लिया क्योंकि छात्रों के साथ हुई घटनाओं ने उन्हें बेहद व्यथित किया। उन्होंने कहा कि जब भविष्य बनाने वाले युवा न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हों, तब उन पर बल प्रयोग किसी भी स्थिति में उचित नहीं माना जा सकता।
उन्होंने लोगों से राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर छात्रों के हित में सोचने की अपील की। उन्होंने कहा, “आपका बेटा-बेटी ही आपके भविष्य की सबसे बड़ी पूंजी है। राजनीतिक दलों के प्रति अंधा समर्थन करने के बजाय युवाओं और विद्यार्थियों के भविष्य को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।”
मनोज जरांगे पाटील ने यह भी कहा कि परीक्षा पत्र लीक जैसी घटनाओं से लाखों छात्रों की वर्षों की मेहनत प्रभावित होती है। उन्होंने सवाल उठाया कि जो छात्र कई वर्षों तक तैयारी करते हैं, उनके साथ यदि ऐसा अन्याय हो तो उनकी मानसिक स्थिति का भी समाज और सरकार को विचार करना चाहिए।
आंदोलनकारियों पर दर्ज किए जा रहे मामलों को लेकर उन्होंने कहा कि पहले भी उनके आंदोलन के दौरान इसी तरह की कार्रवाई की गई थी। उनका आरोप था कि आंदोलनकारियों पर बल प्रयोग कर बाद में उन्हीं पर आरोप लगाए जाते हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
जरांगे पाटील ने कहा कि छात्रों और युवाओं के साथ हुई कथित घटनाओं से आम जनता में नाराजगी है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार जनता की भावनाओं को नहीं समझेगी तो इसका असर भविष्य में लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर भी दिखाई देगा।
उन्होंने बताया कि 9 से 13 अगस्त तक प्रस्तावित पश्चिम महाराष्ट्र दौरा यथावत रहेगा, लेकिन मराठवाड़ा का दौरा फिलहाल रद्द कर वे तत्काल दिल्ली के लिए रवाना हुए हैं, ताकि छात्रों के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद कर सकें।
मनोज जरांगे पाटील ने अंत में कहा कि न्याय के लिए लड़ने वाले छात्रों और आंदोलनकारियों के साथ समाज को मजबूती से खड़ा होना चाहिए। उन्होंने सरकार से अपील की कि छात्रों की समस्याओं का समाधान संवाद और संवेदनशीलता के साथ किया जाए तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।








