NEET पेपर लीक विवाद को लेकर देश की राजनीति लगातार गर्माती जा रही है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी दलों और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अपना विरोध और तेज कर दिया है। शुक्रवार को संसद परिसर में कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों के सांसदों ने प्रदर्शन किया, जबकि जंतर-मंतर पर CJP का धरना लगातार जारी रहा। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक शिक्षा मंत्री अपना इस्तीफा नहीं देते, तब तक विरोध प्रदर्शन समाप्त नहीं होगा।
जंतर-मंतर पर चल रहे धरने का नेतृत्व कर रहे CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने स्पष्ट कहा कि उनकी मांग केवल एक है—धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। उन्होंने कहा कि सरकार जवाबदेही तय करने के बजाय मामले को टालने की कोशिश कर रही है। दिपके ने यह भी कहा कि सोनम वांगचुक द्वारा लंबी भूख हड़ताल समाप्त करने से उन्हें राहत मिली है, लेकिन छात्रों की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के मंत्रियों के साथ प्रस्तावित बैठक किसी निष्पक्ष स्थान पर हो सकती है, लेकिन आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक उनकी प्रमुख मांग पूरी नहीं होती। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल करने के लिए जवाबदेही तय होना आवश्यक है।
उधर संसद परिसर में भी इस मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी, तृणमूल कांग्रेस की सांसद सागरिका घोष सहित कई विपक्षी नेताओं ने संसद के मकर द्वार के निकट प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान सांसदों ने “वी वांट जस्टिस” और सरकार विरोधी नारे लगाए तथा छात्रों के साथ एकजुटता व्यक्त की।
विपक्ष का आरोप है कि NEET पेपर लीक मामले में सरकार जवाबदेही तय करने से बच रही है। CPI (M) के सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा कि विपक्ष की मांग बिल्कुल स्पष्ट है और शिक्षा मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार पारदर्शिता के बजाय विवादित नियुक्तियों के जरिए शिक्षा व्यवस्था को और कमजोर कर रही है।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि समस्या की जड़ पर कार्रवाई किए बिना समाधान संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि जब तक मूल कारणों पर ध्यान नहीं दिया जाएगा, तब तक केवल औपचारिक कदमों से छात्रों का भरोसा वापस नहीं आएगा।
संसद के दोनों सदनों में भी इस मुद्दे पर जोरदार हंगामा देखने को मिला। लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने NEET पेपर लीक, छात्रों के आंदोलन और पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। लगातार शोर-शराबे के कारण लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पहले प्रश्नकाल चलाने की अपील की और बाद में सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी। राज्यसभा में भी इसी तरह का गतिरोध देखने को मिला।
कार्यवाही की शुरुआत में कारगिल विजय दिवस के अवसर पर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी गई, लेकिन उसके तुरंत बाद विपक्ष ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। अध्यक्ष ने विपक्ष को आश्वासन दिया कि प्रश्नकाल के बाद उन्हें अपनी बात रखने का अवसर दिया जाएगा, लेकिन हंगामा नहीं थमने के कारण कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
इस बीच NEET पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में छात्रों का आक्रोश लगातार बना हुआ है। कई छात्र संगठन शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। विपक्ष भी इसी मुद्दे को लेकर सरकार पर लगातार दबाव बना रहा है।
सरकार की ओर से संकेत मिले हैं कि पेपर लीक से जुड़े मामलों में कानून को और सख्त बनाने की तैयारी की जा रही है। प्रस्तावित संशोधनों में दोषियों के लिए अधिक सजा, भारी जुर्माना और मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट जैसी व्यवस्थाओं पर विचार किया जा रहा है। हालांकि विपक्ष का कहना है कि केवल नए कानून पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए।
फिलहाल संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह NEET पेपर लीक का मुद्दा केंद्र में बना हुआ है। आने वाले दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव और तेज होने की संभावना जताई जा रही है, जबकि छात्रों का आंदोलन भी लगातार राष्ट्रीय बहस का विषय बना हुआ है।








