गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए भारतीय संस्कृति में गुरु की महत्ता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि गुरु ज्ञान, संस्कार और जीवन मूल्यों के प्रथम पथप्रदर्शक होते हैं तथा उनका मार्गदर्शन व्यक्ति को सत्य, सेवा और कर्तव्य के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
मुख्यमंत्री ने इस शुभ अवसर पर डीग स्थित श्रीनाथजी मंदिर में मंगला दर्शन कर भगवान श्रीनाथजी के श्रीचरणों में राजस्थान की सुख-शांति, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और निरंतर विकास की कामना की। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा का यह पावन पर्व सभी के जीवन को ज्ञान, संस्कार, सद्मार्ग और आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित करे।
इसके पश्चात मुख्यमंत्री ने गोवर्धन परिक्रमा क्षेत्र स्थित प्राचीन श्री वन बिहारी जी मंदिर में विधि-विधान से दर्शन-पूजन कर भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान उन्होंने श्री अष्ट सखा गोविंद स्वामी जी की पावन बैठक, अष्ट द्वार और ऐतिहासिक ऐरावत कुंड का भी अवलोकन किया।
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को मंदिर परिसर, गोवर्धन परिक्रमा मार्ग, बैठक स्थल तथा ऐरावत कुंड के जीर्णोद्धार, सौंदर्यीकरण, संरक्षण और समग्र विकास के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण केवल हमारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा पावन दायित्व भी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इन धरोहरों के संरक्षण और संवर्धन के संकल्प के साथ निरंतर कार्य कर रही है।
अंत में मुख्यमंत्री ने भगवान श्रीकृष्ण से प्रार्थना की कि उनकी कृपा से राजस्थान निरंतर प्रगति, समृद्धि और लोकमंगल के पथ पर अग्रसर रहे तथा प्रत्येक प्रदेशवासी के जीवन में सुख, शांति और खुशहाली का संचार हो।








