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भारत और अफ्रीका के बीच रिश्ते एक नए दौर में प्रवेश करने जा रहे हैं। इसी महीने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों के ही अफ्रीकी देशों की यात्राएं प्रस्तावित हैं। यह संयोग नहीं बल्कि एक सुविचारित रणनीतिक कदम है, जिसके पीछे भारत की विदेश नीति की गहरी सोच दिखाई देती है। राष्ट्रपति मुर्मू जहां पहली बार अंगोला और बोत्सवाना की राजकीय यात्रा पर जा रही हैं, वहीं प्रधानमंत्री मोदी दक्षिण अफ्रीका में होने वाले जी20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए रवाना होंगे। इन यात्राओं के ज़रिए भारत न केवल कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करेगा बल्कि ऊर्जा, व्यापार और खनिज संसाधनों के क्षेत्र में भी नए अवसर तलाशेगा।
अफ्रीका महाद्वीप तेल, गैस, कोबाल्ट, हीरे और सोने जैसे प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है। भारत, जो अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए वैकल्पिक स्रोतों की खोज में है, अफ्रीका को अपने विश्वसनीय साझेदार के रूप में देख रहा है। राष्ट्रपति मुर्मू की यात्रा से अंगोला और बोत्सवाना के साथ ऊर्जा क्षेत्र, शिक्षा, स्वास्थ्य और डिजिटल कनेक्टिविटी में सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद है। अंगोला अफ्रीका का दूसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है, जबकि बोत्सवाना अपने हीरा खनन उद्योग के लिए प्रसिद्ध है। इन दोनों देशों के साथ भारत के आर्थिक संबंध भविष्य में भारत की ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक विकास के लिए निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा भी उतनी ही रणनीतिक है। दक्षिण अफ्रीका में आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन में भारत का नेतृत्व वैश्विक मंच पर अपनी सक्रिय भूमिका को दर्शाएगा। अफ्रीका और भारत के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंध सदियों पुराने हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इन रिश्तों को और गहराई देने के लिए भारत ने कई ठोस कदम उठाए हैं। “भारत-अफ्रीका फोरम समिट” और “वसुधैव कुटुंबकम” जैसी पहलों के माध्यम से भारत ने अफ्रीका के विकास में अपनी भागीदारी को लगातार बढ़ाया है।
भारत की “साउथ-साउथ कोऑपरेशन” नीति के तहत अफ्रीकी देशों के साथ तकनीकी सहयोग, रक्षा साझेदारी, कृषि सुधार और स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इसके साथ ही भारत अफ्रीका में डिजिटल इंडिया, सौर ऊर्जा और स्किल डेवलपमेंट जैसे प्रोजेक्ट्स भी चला रहा है। राष्ट्रपति मुर्मू की यात्रा इन परियोजनाओं को और मजबूत करेगी। यह यात्रा भारत की “नारी शक्ति” की कूटनीतिक भूमिका को भी रेखांकित करती है, क्योंकि यह पहली बार है जब भारत की कोई महिला राष्ट्रपति अफ्रीकी देशों की राजकीय यात्रा पर जा रही हैं।
दक्षिण अफ्रीका की धरती पर प्रधानमंत्री मोदी का आगमन भी भारत-अफ्रीका संबंधों के विस्तार का प्रतीक है। जी20 शिखर सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, जलवायु परिवर्तन, सतत विकास और वैश्विक दक्षिण देशों की आवाज को मजबूत करने पर चर्चा होगी। भारत, जो इस वर्ष जी20 की अध्यक्षता भी कर चुका है, अब अफ्रीका के साथ मिलकर विकासशील देशों के हितों की वकालत करेगा।
कूटनीतिक दृष्टि से देखें तो यह समानांतर यात्राएं भारत की अफ्रीका नीति का एक नया अध्याय खोल रही हैं। यह केवल औपचारिक दौरे नहीं हैं, बल्कि “नए भारत” की उस वैश्विक सोच का हिस्सा हैं, जिसमें सहयोग, समृद्धि और सम्मान को प्राथमिकता दी गई है। अफ्रीका की धरती पर भारत की बढ़ती उपस्थिति न केवल आर्थिक अवसरों को जन्म देगी बल्कि भू-राजनीतिक स्तर पर भी भारत की स्थिति को और मजबूत करेगी।
इन यात्राओं के बाद भारत और अफ्रीका के बीच व्यापार, निवेश, शिक्षा और सुरक्षा सहयोग में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद की जा रही है। कुल मिलाकर, राष्ट्रपति मुर्मू और प्रधानमंत्री मोदी की अफ्रीकी यात्राएं इस बात का संकेत हैं कि भारत अब केवल “पूर्व की ओर देखने” की नीति तक सीमित नहीं है, बल्कि “दक्षिण के साथ साझेदारी” की दिशा में भी ठोस कदम बढ़ा चुका है। यह कदम भारत की वैश्विक कूटनीति को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाला साबित हो सकता है।







