केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार, 8 नवंबर 2025 को कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा बिहार में लगाए गए ‘मत चोरी’ के आरोपों को निराधार करार दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अगर राहुल गांधी को यह लगता है कि कहीं वोट चोरी हो रही है, तो उन्हें चुनाव आयोग (ECI) के पास जाकर सबूत के साथ शिकायत दर्ज करनी चाहिए।
राजनाथ सिंह ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा,
“अगर राहुल गांधी को लगता है कि बिहार में वोट चोरी हो रही है, तो उन्हें चुनाव आयोग के पास जाकर शिकायत करनी चाहिए। वह ऐसा नहीं कर रहे हैं। वह केवल संविधानिक संस्था पर निराधार आरोप लगा रहे हैं।”
राहुल गांधी ने हाल ही में बिहार में मतदान प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाया था। उनके अनुसार, कुछ क्षेत्रों में मतदाता अपने मत देने में असमर्थ थे और कुछ वोटिंग मशीनों में गड़बड़ी देखने को मिली। उन्होंने इसे मत चोरी का उदाहरण बताया।
हालांकि, इन आरोपों का कोई आधिकारिक या ठोस सबूत अभी तक सार्वजनिक नहीं हुआ है। चुनाव आयोग की ओर से भी इस मामले पर फिलहाल कोई बयान जारी नहीं किया गया है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में आरोप लगाने से पहले सबूत होना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि बिना प्रमाण के आरोप लगाने से न केवल राजनीतिक स्थिरता पर असर पड़ता है, बल्कि आम जनता में भ्रम भी फैलता है।
राजनाथ सिंह ने यह भी संकेत दिया कि विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोप अक्सर राजनीतिक रणनीति के तहत किए जाते हैं, जबकि देश की चुनावी संस्थाएं निष्पक्ष तरीके से काम कर रही हैं।
उन्होंने कहा,
“भारत की चुनावी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और भरोसेमंद है। किसी भी आरोप को प्रमाण के बिना फैलाना लोकतंत्र के हित में नहीं है। राहुल गांधी को चाहिए कि वह चुनाव आयोग के पास जाकर मामले को प्रमाण के साथ उठाएं।”
राजनाथ सिंह ने यह स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग देश के चुनावों की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए संवैधानिक रूप से स्वतंत्र है।
भारत में हर चुनाव के दौरान आरोप-प्रत्यारोप आम बात हैं। विपक्ष कभी-कभी चुनावी गड़बड़ी या मत चोरी के आरोप लगाकर सरकार की साख पर सवाल उठाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि राहुल गांधी के आरोप चुनावी रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं। हालांकि, बिना प्रमाण के आरोप लगाने से जनता और मीडिया में भ्रम पैदा होता है।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन इसे सावधानीपूर्वक और प्रमाण के आधार पर ही उठाना चाहिए।
चुनाव आयोग भारत के सर्वोच्च चुनाव प्राधिकरण के रूप में जाना जाता है। इसकी जिम्मेदारी है कि वह निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करे।
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यदि कोई नेता मत चोरी के आरोप लेकर आता है, तो आयोग इसकी स्वयं जांच करता है।
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आयोग के पास शिकायत दर्ज कराने के बाद साक्ष्य और गवाह पेश करने की प्रक्रिया होती है।
इसलिए राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि राहुल गांधी को आयोग के पास जाकर आरोपों के प्रमाण पेश करने चाहिए, ताकि मामला निष्पक्ष रूप से सुलझ सके।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आगामी चुनावों के दौरान ध्यान आकर्षित करने वाला मुद्दा बन सकता है।
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अगर राहुल गांधी सबूत के साथ आयोग में शिकायत दर्ज कराते हैं, तो मामला कानूनी और राजनीतिक दृष्टि से गंभीर बन जाएगा।
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दूसरी ओर, केंद्र सरकार और भाजपा इसे निराधार और राजनीतिक चाल करार देकर खारिज कर सकती है।
इस घटना से यह स्पष्ट हो गया है कि भारत के लोकतंत्र में आरोप और जांच का संतुलन कितना महत्वपूर्ण है। राजनाथ सिंह ने यह संदेश दिया कि लोकतंत्र में आरोप लगाने से पहले जिम्मेदारी और सबूत होना आवश्यक है।








