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  • कर्नाटक के सुत्तूर मठ जा रहे उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, एक सप्ताह में तीसरे राज्य का दौरा — जानें पूरा शेड्यूल

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    भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन रविवार को कर्नाटक के दौरे पर जा रहे हैं। यह दौरा उनके लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि उपराष्ट्रपति का पदभार संभालने के बाद यह उनका पहला कर्नाटक दौरा होगा। गौरतलब है कि राधाकृष्णन पिछले एक सप्ताह में तीन राज्यों का दौरा कर चुके हैं। वे 3 और 4 नवंबर को केरल में और 5 नवंबर को छत्तीसगढ़ में विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल हुए थे। अब वे कर्नाटक की धरती पर धार्मिक और शैक्षणिक दोनों क्षेत्रों से जुड़े आयोजनों में हिस्सा लेंगे।

    उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन कर्नाटक के हासन जिले के प्रसिद्ध तीर्थस्थल श्रवणबेलगोला में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में शामिल होंगे। यह आयोजन आचार्य श्री 108 शांति सागर महाराज की स्मृति में किया जा रहा है, जिनकी 1925 में श्रवणबेलगोला की पहली यात्रा को इस वर्ष 100 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस मौके पर ‘चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री 108 शांति सागर महाराज स्मृति समारोह’ का आयोजन किया गया है, जिसमें देशभर से धर्माचार्य, संत, विद्वान और अनुयायी शामिल होंगे।

    समारोह के दौरान उपराष्ट्रपति आचार्य श्री शांति सागर महाराज की प्रतिमा स्थापना में भाग लेंगे और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इसके साथ ही वे ‘चौथी पहाड़ी’ के नामकरण समारोह में भी शामिल होंगे। यह कार्यक्रम जैन धर्म के आध्यात्मिक इतिहास और भारतीय संस्कृति में योगदान की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रतीक माना जा रहा है।

    श्रवणबेलगोला में आयोजित यह समारोह न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारतीय सांस्कृतिक धरोहर और नैतिकता के मूल्यों को भी उजागर करता है। आचार्य श्री शांति सागर महाराज ने अपने जीवनकाल में अहिंसा, सत्य और संयम के आदर्शों को अपनाकर लाखों लोगों को प्रेरित किया। उपराष्ट्रपति का इस समारोह में शामिल होना इस परंपरा के प्रति राष्ट्र की श्रद्धा और सम्मान को दर्शाता है।

    कर्नाटक यात्रा के दौरान उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन मैसूर स्थित जगद्गुरु श्री वीरसिंहासन महासंस्थान मठ से जुड़े जेएसएस अकादमी ऑफ हायर एजुकेशन एंड रिसर्च के 16वें दीक्षांत समारोह में भी भाग लेंगे। इस अवसर पर वे स्नातक और परास्नातक छात्रों को डिग्रियां प्रदान करेंगे और उन्हें भविष्य के लिए प्रेरित करेंगे। यह अकादमी दक्षिण भारत की प्रमुख शैक्षणिक संस्थाओं में से एक है, जिसने शिक्षा, अनुसंधान और चिकित्सा सेवाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है।

    सूत्रों के अनुसार, उपराष्ट्रपति इस दौरे के दौरान कर्नाटक सरकार के प्रतिनिधियों, धार्मिक नेताओं और शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों से भी मुलाकात कर सकते हैं। उनकी यह यात्रा न केवल धार्मिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का संदेश देने वाली है, बल्कि यह भारत के युवाओं को भी शिक्षा और नैतिकता के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी।

    कर्नाटक का यह दौरा उपराष्ट्रपति के सक्रिय राष्ट्रीय कार्यक्रमों का हिस्सा है, जिसमें वे देश के विभिन्न राज्यों में जाकर विकास, शिक्षा, धर्म और संस्कृति के विषयों पर संवाद कर रहे हैं। उनकी यह पहल केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग को मजबूत बनाने और समाज के विभिन्न वर्गों के साथ सीधा संवाद स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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