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  • उडुपी में PM मोदी का भव्य रोड-शो: गीता पारायण कार्यक्रम से पहले जनसैलाब उमड़ा

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    कर्नाटक का तटीय धार्मिक नगर उडुपी 28 नवंबर 2025 को भक्ति, आध्यात्मिकता और उत्साह से सराबोर दिखा, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहली बार इस शहर के दौरे पर पहुँचे। उनका आगमन केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और धार्मिक आस्था का महोत्सव बन गया। स्थानीय लोगों ने अभूतपूर्व संख्या में सड़कों पर एकत्र होकर प्रधानमंत्री का स्वागत किया और शहर में ऐतिहासिक जनसैलाब उमड़ पड़ा।

    सुबह प्रधानमंत्री का रोड-शो बाननजे सर्कल से शुरू होकर कालसांका जंक्शन तक पहुँचा। जैसे ही उनका काफिला आगे बढ़ा, दोनों ओर खड़े लोग तिरंगे लहराते दिखाई दिए। बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं — हर वर्ग के लोगों ने उत्साहित होकर मोदी का स्वागत किया।

    उडुपी के सांस्कृतिक रंग रोड-शो में साफ झलके — पारंपरिक यक्षगान के कलाकार, ढोल-नगाड़े, कृष्ण-लीला झांकियां और लोक कलाकार पूरे मार्ग को उत्सव स्थल में बदलते दिखाई दिए। पूरा वातावरण “मोदी-मोदी” और “भारत माता की जय” के नारों से गूंज उठा।

    प्रधानमंत्री ने जनता की ओर हाथ हिलाकर अभिवादन स्वीकार किया, और यह दृश्य स्थानीय नागरिकों के लिए किसी पर्व जैसा बन गया।

    रोड-शो समाप्त होने के बाद प्रधानमंत्री सीधे उडुपी के प्रख्यात श्री कृष्ण मठ पहुँचे। मठ में उनका स्वागत पारंपरिक ‘पूर्ण कुंभ’ से किया गया।

    इस मौके पर प्रधानमंत्री ने मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की। श्रीकृष्ण की मूर्ति के दर्शन के बाद वे ‘लक्ष कांथा गीता पारायण’ कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अनोखे आयोजन में लगभग एक लाख श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से श्रीमद्भगवद्गीता का पारायण किया। इतने बड़े पैमाने पर एक साथ गीता पाठ का आयोजन अपनी तरह का ऐतिहासिक क्षण बन गया।

    प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा का एक प्रमुख हिस्सा मंदिर में नव-निर्मित धार्मिक संरचनाओं का उद्घाटन था।

    1. सुवर्ण तीर्थ मंटप (Suvarna Teertha Mantapa) का उद्घाटन

    यह मंटप श्री कृष्ण के गर्भगृह के सामने स्थापित किया गया है। इसका निर्माण मंदिर की आध्यात्मिक और स्थापत्य भव्यता में वृद्धि करता है। उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री ने इसे भक्तों की सुविधा और श्रद्धा को समर्पित बताया।

    2. कनक कवच (Kanaka Kavacha) का समर्पण

    मठ परिसर में स्थित पवित्र “कनकाना किंडी” — जिसे संत-कवि कनकदास ने कृष्ण-दर्शन के लिए उपयोग किया था — पर अब स्वर्ण-आवरण (Golden Cover) लगाया गया है। प्रधानमंत्री ने इस कनक कवच को मंदिर को अर्पित किया।

    यह धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने का महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    प्रधानमंत्री के दौरे को देखते हुए उडुपी में अत्यंत कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई।

    • लगभग 3,000 से अधिक पुलिस व सुरक्षा कर्मी तैनात किए गए

    • रोड-शो मार्ग पर दोहरी बैरिकेडिंग

    • भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष ड्रोन निगरानी

    • गीता पारायण कार्यक्रम में केवल पासधारी लोगों को प्रवेश

    • ड्रोन, बोतल, बैग, फ्लैग पोल जैसी वस्तुओं पर प्रतिबंध

    स्थानीय प्रशासन ने भी इस कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसमें ट्रैफिक प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण प्राथमिकता रहे।

    लक्ष कांथा गीता पारायण केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं था — यह भारत की आध्यात्मिक विरासत और सांस्कृतिक समरसता का प्रतीक बन गया।

    • एक लाख लोगों का सामूहिक गीता पाठ भारतीय आध्यात्मिक शक्ति का अनूठा प्रदर्शन रहा

    • इसमें साधु-संत, छात्र, महिलाएँ, वृद्ध, और सभी पंथों के लोग जुड़े

    • कार्यक्रम ने उडुपी को राष्ट्रीय आध्यात्मिक केंद्र के रूप में और भी सुदृढ़ किया

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उडुपी का श्री कृष्ण मठ भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है और यहाँ आना अपने-आप में गर्व का क्षण है।

    प्रधानमंत्री की यह यात्रा उडुपी के लिए ऐतिहासिक रही।
    लोकप्रियता, भक्ति, आध्यात्मिकता और जनभागीदारी — इन सभी का अद्भुत संगम इस दिन देखने को मिला।

    रोड-शो की ऊर्जा, गीता पारायण की शांति और मंदिर में धार्मिक उद्घाटन — इन सबने मिलकर 28 नवंबर 2025 को उडुपी की यादों में अमर बना दिया है।

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