अवास कैवर्त | छत्तीसगढ़ | समाचार वाणी न्यूज़
जिला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में सहायक शिक्षक/समग्र शिक्षक फेडरेशन ने प्रदेश सरकार के खिलाफ एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया। संगठन ने मोदी की गारंटी के तहत अपनी 4 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन शुरू किया।
जिलाध्यक्ष दिनेश कुमार राठौर ने कहा कि सरकार ने चुनाव पूर्व अपने घोषणापत्र में सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति दूर करने और सभी शिक्षकों को क्रमोन्नत वेतनमान देने का वादा किया था, लेकिन दो वर्ष गुजर जाने के बाद भी कोई कदम नहीं उठाया गया। इससे पूरे प्रदेश के LB संवर्ग शिक्षकों में असंतोष व्याप्त है।
उन्होंने बताया कि TET परीक्षा पास करने का दबाव डालकर शिक्षकों को पदोन्नति और नौकरी से वंचित करने की बातें की जा रही हैं, जबकि भर्ती के समय शिक्षक उस पद के लिए योग्य थे। नया नियम पुराने शिक्षकों पर थोपे जाने को अनुचित ठहराया गया।
साथ ही, VSK ऐप के माध्यम से ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने की योजना को भी शिक्षक निजता के लिए खतरा बताते हुए खारिज किया। ऐप में निजी जानकारी और बैंक विवरण तक का एक्सेस होने के कारण साइबर ठगी की घटनाएं भी सामने आई हैं।
संगठन ने सरकार से मांग की है कि सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति को दूर किया जाए, सभी शिक्षकों को क्रमोन्नत वेतनमान और पूर्व सेवा का पूरा लाभ दिया जाए, TET की अनिवार्यता समाप्त की जाए और VSK ऐप बंद किया जाए। यदि ऑनलाइन उपस्थिति लेना आवश्यक है तो शिक्षकों को डिवाइस उपलब्ध कराए जाएँ या पहले दिए गए टेबलेट की मरम्मत करवाई जाए।
धरना-प्रदर्शन में जिलाध्यक्ष दिनेश कुमार राठौर, जिला महासचिव ओमप्रकाश सोनवानी, जिला सचिव अजय चौधरी, महिला प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष किरण रघुवंशी, ब्लॉक अध्यक्ष अमिताभ चटर्जी, कन्हैया सोनवानी, मोहनराम मिश्रा, सुपेत मरावी, संजय सोनी, राजेश चौधरी, राज कुमार पटेल, रत्नेश सोनी, भागीरथी कैवर्त, महेंद्र मिश्रा, यज्ञनारायण शर्मा, हेमन्त राठौर, विनय प्रताप सिंह राठौर, छोटेलाल बनवासी, दीपचंद गुप्ता, धर्मेन्द्र कैवर्त, प्रह्लाद सिंह वाकरे, विजय साहू, संदीप दुबे, पारस सिंह प्रधान सहित सैकड़ों LB संवर्ग शिक्षक शामिल हुए।
धरना स्थल पर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन तहसीलदार शेषनारायण जायसवाल को सौंपा गया। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने मांगों पर कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी तो वह अनिश्चितकालीन आंदोलन का विकल्प चुनने को मजबूर होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।








