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  • निपाह वायरस अलर्ट: थाईलैंड, नेपाल और ताइवान सतर्क

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    भारत के पश्चिम बंगाल में जानलेवा निपाह वायरस के नए मामलों ने न सिर्फ देश बल्कि एशिया के कई हिस्सों में चिंता बढ़ा दी है। संक्रमण की गंभीरता को देखते हुए थाईलैंड, नेपाल और ताइवान जैसे देशों ने अपने हवाई अड्डों और सीमाओं पर निगरानी कड़ी कर दी है।

     स्वास्थ्यकर्मी भी संक्रमित, क्वारंटीन बढ़ाया गया

    इस महीने की शुरुआत में पश्चिम बंगाल में पांच स्वास्थ्यकर्मी निपाह वायरस से संक्रमित पाए गए, जिनमें से एक की हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है। संक्रमितों के संपर्क में आए करीब 110 लोगों को एहतियातन क्वारंटीन किया गया है। सभी मामले बारासात के एक निजी अस्पताल से जुड़े बताए जा रहे हैं।

    थाईलैंड और नेपाल ने शुरू की स्क्रीनिंग

    संक्रमण के खतरे को देखते हुए थाईलैंड ने बैंकॉक और फुकेत के तीन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर पश्चिम बंगाल से आने वाली उड़ानों के यात्रियों की स्वास्थ्य जांच शुरू कर दी है। यात्रियों से स्वास्थ्य संबंधी घोषणापत्र भरवाए जा रहे हैं।

    नेपाल ने भी काठमांडू एयरपोर्ट और भारत से जुड़े स्थल सीमा बिंदुओं पर स्क्रीनिंग लागू कर दी है।

     ताइवान में ‘कैटेगरी-5’ में शामिल करने का प्रस्ताव

    ताइवान के स्वास्थ्य अधिकारियों ने निपाह वायरस को “कैटेगरी-5 बीमारी” की सूची में शामिल करने का प्रस्ताव रखा है। इस श्रेणी में ऐसी दुर्लभ और उभरती बीमारियां आती हैं, जिनसे सार्वजनिक स्वास्थ्य को गंभीर खतरा होता है और जिनके लिए तत्काल रिपोर्टिंग जरूरी होती है।

     निपाह वायरस क्या है और कैसे फैलता है?

    निपाह वायरस जानवरों से इंसानों में फैल सकता है, खासकर फल खाने वाले चमगादड़ और सूअर इसके प्रमुख स्रोत माने जाते हैं। यह वायरस दूषित भोजन या संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क से भी फैल सकता है।

    विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने निपाह को शीर्ष 10 प्राथमिक बीमारियों में शामिल किया है, जिनमें कोविड-19 और जीका जैसे वायरस भी हैं।

    लक्षण और खतरा

    निपाह वायरस का इन्क्यूबेशन पीरियड 4 से 14 दिन तक हो सकता है।
    प्रारंभिक लक्षणों में शामिल हैं:

    • बुखार

    • सिरदर्द

    • मांसपेशियों में दर्द

    • उल्टी

    • गले में खराश

    गंभीर मामलों में मरीज को निमोनिया, बेहोशी और दिमाग की सूजन (एन्सेफलाइटिस) हो सकती है, जो जानलेवा साबित हो सकती है।

    इस वायरस की मृत्यु दर 40% से 75% तक मानी जाती है, और फिलहाल कोई प्रभावी वैक्सीन या दवा उपलब्ध नहीं है।

    पहले भी हो चुके हैं निपाह के प्रकोप

    • 1998: मलेशिया में पहला बड़ा प्रकोप, 100 से अधिक मौतें

    • 2001 और 2007: पश्चिम बंगाल में मामले

    • 2018 और 2023: केरल में गंभीर प्रकोप, बड़ी संख्या में मौतें

    • बांग्लादेश: 2001 के बाद 100 से अधिक मौतें

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