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राजस्थान की राजधानी Jaipur के Jhotwara इलाके में शनिवार को एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जहां सीवर टैंक की सफाई के दौरान जहरीली गैस के कारण दम घुटने से दो सफाईकर्मियों की मौत हो गई। इस घटना ने एक बार फिर शहरी व्यवस्थाओं में सुरक्षा मानकों की अनदेखी को उजागर कर दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, निवाड़ू रोड स्थित शेखावत मार्ग पर दोपहर करीब तीन बजे शास्त्री नगर निवासी अजय (41) सीवर लाइन की सफाई के लिए नीचे उतरे थे। कुछ समय बाद जब ऊपर खड़े बनीपार्क निवासी रामबाबू (40) ने उन्हें आवाज लगाई और कोई जवाब नहीं मिला, तो उन्होंने आशंका के चलते खुद भी सीवर में प्रवेश कर लिया। अंदर मौजूद जहरीली गैस, विशेष रूप से मीथेन के कारण दोनों का दम घुट गया और मौके पर ही उनकी मृत्यु हो गई।
यह हादसा ऐसे समय में हुआ है जब सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई को लेकर स्पष्ट सुरक्षा दिशा-निर्देश पहले से मौजूद हैं। नियमों के अनुसार, इस तरह के कार्यों में मशीनों का उपयोग अनिवार्य है और किसी भी आपात स्थिति में मानव को बिना सुरक्षा उपकरणों जैसे पीपीई किट, गैस डिटेक्टर और ऑक्सीजन सपोर्ट के अंदर भेजना प्रतिबंधित है। इसके बावजूद इन नियमों का पालन नहीं किया गया, जिससे यह दुखद घटना घटी।
घटना के बाद देर रात प्रशासन, ठेकेदार और सामाजिक प्रतिनिधियों के बीच बैठक आयोजित की गई। इस दौरान मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने पर सहमति बनी। तय किए गए प्रावधान के अनुसार, प्रत्येक मृतक के परिवार को कुल 55 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसमें मुख्यमंत्री सहायता कोष से 5 लाख रुपये, नगर निगम की ओर से 10 लाख रुपये, ठेकेदार की ओर से 10 लाख रुपये और सामाजिक न्याय विभाग की ओर से 30 लाख रुपये शामिल हैं। प्रारंभिक रूप से 5 लाख रुपये की सहायता राशि परिजनों को सौंप दी गई है।
इसके अलावा, मृतकों के परिजनों को डेयरी बूथ आवंटित करने और संविदा के आधार पर नौकरी देने का आश्वासन भी दिया गया है। प्रशासन और कर्मचारियों के बीच सहमति बनने के बाद प्रस्तावित हड़ताल को टाल दिया गया है और कर्मचारी शनिवार से अपने कार्य पर लौटने के लिए तैयार हैं।
इस पूरे मामले में जिम्मेदारी तय करने को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। झोटवाड़ा जोन के संबंधित अधिकारियों पर निगरानी की जिम्मेदारी थी, जबकि सीवर सफाई का ठेका निजी कंपनी को दिया गया था। आरोप है कि पर्याप्त सुरक्षा संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं की गई, जिसके कारण यह हादसा हुआ।
नगर निगम प्रशासन की ओर से मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि एक जांच समिति गठित की जाएगी, जो पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच करेगी। यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि जमीनी स्तर पर सुरक्षा नियमों के पालन में अब भी गंभीर कमी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त निगरानी और जवाबदेही तय करना अत्यंत आवश्यक है।
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने भी इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।








