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  • पहले 15 फिर 9 मौतें… पाकिस्तान के खैबर में दहशत फैला रहा इत्तिहाद-उल-मुजाहिदीन, काबुल कनेक्शन पर सवाल

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    पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वाह प्रांत में लगातार हो रहे आतंकी हमलों ने वहां की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पहले बन्नू में हुए हमले में 15 लोगों की मौत हुई और अब लक्की मारवात में 9 लोगों की जान चली गई। इन दोनों हमलों के बाद एक नए आतंकी संगठन “इत्तिहाद-उल-मुजाहिदीन” का नाम तेजी से सामने आ रहा है।

    खास बात यह है कि ये हमले ऐसे समय में हो रहे हैं जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच संघर्षविराम लागू है और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) पिछले कुछ महीनों से अपेक्षाकृत शांत है। ऐसे में पाकिस्तान में सवाल उठने लगे हैं कि आखिर टीटीपी के प्रभाव वाले इलाकों में अब कौन सा संगठन सक्रिय हो गया है।

    बीबीसी उर्दू की रिपोर्ट के अनुसार, खैबर में हाल ही में हुए हमलों की जिम्मेदारी इत्तिहाद-उल-मुजाहिदीन ने ली है। इस संगठन की स्थापना 2025 में हुई थी। बताया जाता है कि तीन आतंकी संगठनों—इस्लामिक क्रांति, लश्कर-ए-इस्लाम और हाफिज गुल बहादुर गुट—ने मिलकर इसे बनाया था।

    हाफिज गुल बहादुर गुट पहले तहरीक-ए-तालिबान से जुड़ा हुआ माना जाता था। पाकिस्तान सरकार कभी इसे “गुड तालिबान” कहती थी, लेकिन अब इसी गुट से जुड़े तत्व नए संगठन के जरिए फिर से सक्रिय हो रहे हैं।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, इत्तिहाद-उल-मुजाहिदीन सीधे बड़े सैन्य टकराव से बचता है और मुख्य रूप से आत्मघाती हमलों के जरिए अपने टारगेट को निशाना बनाता है। संगठन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर भी सक्रिय बताया जा रहा है, जहां पश्तो, उर्दू और अंग्रेजी भाषाओं में प्रचार सामग्री पोस्ट की जाती है।

    बन्नू और लक्की मारवात में हुए हालिया हमलों के बाद पाकिस्तान सरकार ने अफगानिस्तान के राजनयिक को तलब किया है। पाकिस्तान का आरोप है कि इस आतंकी संगठन का कनेक्शन काबुल से जुड़ा हुआ है और हमलों की साजिश अफगानिस्तान की जमीन से रची जा रही है।

    हालांकि अफगानिस्तान की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियां लगातार सीमा पार आतंकी नेटवर्क पर नजर बनाए हुए हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि तहरीक-ए-तालिबान के कमजोर पड़ने के बाद कई छोटे आतंकी गुट एकजुट होकर नए नाम और रणनीति के साथ सामने आ रहे हैं। इत्तिहाद-उल-मुजाहिदीन भी उसी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।

    खैबर पख्तूनख्वाह लंबे समय से आतंकवाद और चरमपंथ से प्रभावित इलाका रहा है। अफगान सीमा से सटे होने के कारण यहां आतंकी गतिविधियों को रोकना पाकिस्तान के लिए हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। अब नए संगठन की सक्रियता ने पाकिस्तान सरकार की चिंता और बढ़ा दी है।

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