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पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में जारी हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बीच पाकिस्तान सरकार की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। क्षेत्र में तैनाती मिलने के बावजूद बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी ड्यूटी पर जाने से बच रहे हैं, जिससे कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान सरकार के एक आधिकारिक दस्तावेज से खुलासा हुआ है कि कई पुलिसकर्मियों ने PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान में नियुक्ति के बावजूद अपनी ड्यूटी जॉइन नहीं की है। इस स्थिति को गंभीर मानते हुए प्रशासन ने ऐसे कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, ड्यूटी पर न पहुंचने वाले एक पुलिसकर्मी को हाल ही में सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। इसके साथ ही पुलिस विभाग ऐसे सभी कर्मियों की विस्तृत सूची तैयार कर रहा है। बताया जा रहा है कि भविष्य में कानून बनाकर बड़े स्तर पर कार्रवाई की जा सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पुलिसकर्मियों के ड्यूटी से दूरी बनाने के पीछे सबसे बड़ा कारण सुरक्षा का खतरा है। PoK में पिछले कुछ समय से लगातार विरोध प्रदर्शन और हिंसक घटनाएं सामने आ रही हैं। हाल ही में हुई झड़पों में कई पुलिसकर्मियों और नागरिकों की मौत की खबरें भी सामने आई हैं, जिससे सुरक्षा बलों के बीच चिंता बढ़ गई है।
दूसरा बड़ा कारण वेतन और भत्तों को लेकर असंतोष बताया जा रहा है। पुलिसकर्मियों का आरोप है कि उन्हें पाकिस्तान के अन्य प्रांतों की तुलना में काफी कम वेतन दिया जाता है। लंबे समय से वेतन विसंगतियों को लेकर असंतोष बना हुआ है और पहले भी हजारों पुलिसकर्मी विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान के पंजाब और सिंध प्रांतों में कार्यरत पुलिसकर्मियों की तुलना में PoK में तैनात कर्मियों को काफी कम वेतन मिलता है। इसी वजह से कई कर्मचारी वहां नियुक्ति लेने से बच रहे हैं।
वहीं, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में राजनीतिक स्थिति भी लगातार तनावपूर्ण बनी हुई है। पाकिस्तान सरकार क्षेत्र में चुनाव कराने की तैयारी कर रही है, लेकिन स्थानीय संगठनों और नागरिक समूहों द्वारा इसका विरोध किया जा रहा है। प्रदर्शनकारी विधानसभा में आरक्षित सीटों और अन्य राजनीतिक मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ आंदोलन चला रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सुरक्षा बलों के भीतर असंतोष और विरोध प्रदर्शनों का दबाव इसी तरह बढ़ता रहा, तो पाकिस्तान सरकार के लिए PoK में प्रशासनिक नियंत्रण बनाए रखना और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है। फिलहाल सरकार हालात पर नजर बनाए हुए है और कानून-व्यवस्था बहाल करने के प्रयास जारी हैं।








