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  • दुनिया से भारत के लिए राहतभरी खबर! जुलाई के बाद सस्ता हो सकता है पेट्रोल-डीजल, कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट की संभावना

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    पिछले कुछ महीनों से कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने दुनिया भर के देशों की चिंता बढ़ा दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) बंद होने के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला। हालांकि अब भारत समेत दुनिया के कई देशों के लिए राहत की खबर सामने आई है।

    ग्लोबल रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग ने कच्चे तेल की कीमतों को लेकर नया अनुमान जारी किया है। एजेंसी के मुताबिक यदि जुलाई के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य दोबारा खुल जाता है और तेल आपूर्ति सामान्य हो जाती है, तो अगस्त और सितंबर से कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है।

    फिच रेटिंग के अनुसार वर्ष 2026 में ब्रेंट क्रूड का औसत मूल्य लगभग 87 डॉलर प्रति बैरल रह सकता है। वहीं मई से जुलाई के बीच कच्चे तेल की कीमतें 100 से 110 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में बनी रहने की संभावना जताई गई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज मार्ग फिर से पूरी तरह चालू हो जाता है, तो अगस्त में कच्चे तेल की कीमतें घटकर 80 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकती हैं। इसके बाद सितंबर तक यह कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच सकती है। ऐसे में भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है।

    फिच का कहना है कि वर्तमान में तेल की कीमतों में आई तेजी उत्पादन की कमी के कारण नहीं, बल्कि आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं की वजह से है। युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के कारण होर्मुज मार्ग प्रभावित हुआ है, जिससे तेल की ढुलाई पर असर पड़ा। हालांकि तेल उत्पादन केंद्रों और रिफाइनरियों को कोई स्थायी नुकसान नहीं पहुंचा है।

    एजेंसी के अनुसार होर्मुज मार्ग खुलने के बाद वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति तेजी से बढ़ सकती है। इसके अलावा ओपेक और ओपेक प्लस देशों द्वारा उत्पादन बढ़ाने की योजना भी बाजार में अतिरिक्त तेल उपलब्ध करा सकती है। इससे कीमतों पर और दबाव बनेगा तथा तेल सस्ता होने की संभावना बढ़ेगी।

    होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। प्रतिदिन करीब 2 करोड़ बैरल कच्चे तेल का परिवहन यहां से होता है। इसलिए इस मार्ग में किसी भी प्रकार की बाधा का असर सीधे वैश्विक तेल बाजार पर पड़ता है।

    भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट बेहद महत्वपूर्ण है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता होता है, तो पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। इससे परिवहन लागत घटने और महंगाई पर नियंत्रण पाने में भी मदद मिल सकती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौजूदा परिस्थितियां अनुकूल रहीं और जुलाई में होर्मुज मार्ग फिर से खुल गया, तो वर्ष 2026 के दूसरे हिस्से में तेल बाजार में स्थिरता लौट सकती है और आम उपभोक्ताओं को ईंधन की कीमतों में राहत मिल सकती है।

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